“भद्र देश के महाराज अश्वपति बड़े धर्मात्मा और प्रजापालक थे, परंतु उनकी कोई संतान नहीं थी। पराशर मुनि के उपदेश से उन्होंने गायत्री अनुष्ठान किया और देवी की कृपा से उन्हें सावित्री नाम की कन्या प्राप्त हुई।”
सावित्री व्रत की संपूर्ण मार्गदर्शिका: सावित्री-सत्यवान और नाग-नागिन की कथा, साथ ही विस्तृत पूजा विधि और सामग्री।