संख्या में मिथिला
इतिहास
विदेह की प्राचीन वंशावली और मिथिला के आधुनिक विकास का पता लगाएं।
कर्नाट वंश (1097–1324 CE)
नान्यदेव द्वारा स्थापित, इस युग को अक्सर मिथिला का 'स्वर्ण काल' कहा जाता है। इसमें कला, संगीत और साहित्य का पुनरुत्थान हुआ। राजा हरिसिंहदेव कला और सामाजिक सुधार के संरक्षक थे और उन्होंने पंजी व्यवस्था की स्थापना की थी।
ओइनिवार वंश (1325–1526 CE)
महान कवि विद्यापति के लिए जाना जाता है, जिनके गीतों ने क्षेत्र की साहित्यिक पहचान को आकार दिया। शासक मैथिल ब्राह्मण थे जिन्होंने लक्ष्मीनाथ सिंह देव की मृत्यु तक गहरी सांस्कृतिक वृद्धि को बढ़ावा दिया।
अराजकता का काल (1526–1577 ई.)
ओइनिवार वंश के पतन के बाद, मिथिला ने पांच दशकों तक राजनीतिक अस्थिरता और कानूनविहीनता का सामना किया। इस युग का अंत तब हुआ जब मुगल सम्राट अकबर ने महेश ठाकुर को यह क्षेत्र प्रदान किया, जिससे खंडवाला वंश (दरभंगा राज) की स्थापना हुई।
कला
मधुबनी के रंगों और इस भूमि की परंपराओं में डूब जाएं।
मंत्र
पवित्र मंत्रों और भक्ति की प्राचीन व्रत कथाओं के साथ शांति पाएं।
व्यंजन
अद्वितीय व्यंजनों का स्वाद लें और मिथिला की दिल छू लेने वाली कहानियाँ पढ़ें।






