व्रत कथा

मिथिलाक पावनि-तिहार आ व्रत क पावन कथा सब।

📖 कथा अंश

“भद्र देशक महाराज बडे धर्मात्मा प्रजा पालक अश्वपति छलाह, तनिका कोनो संतान नहीं छलेंह। से महाराज महारानी मालवीक अनुमति पाबी वन जाय परासर मुनिक उपदेश सौं गायात्रिक अनुष्ठान कैलेंह। गायत्री देवी सौं वर लाभ कई राजा राजधानी आएलाह, पश्चात हुनका एक कन्या जन्म लेलथींह। सावित्रिक अनुष्ठान सौं कन्याक जन्म भेलेंह तें ताहि कन्याक सावित्री नाम राखल गेलेंह।”

महत्व / परिचय

सावित्री व्रतक संपूर्ण मार्गदर्शिका: सावित्री-सत्यवान आ नाग-नागिनक कथाक संगहि विस्तृत पूजा विधि आ सामग्री।

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“कैलाश पर्वतक रमणीय शिखर पर भगवती पार्वती भगवान शिवजी सँ हाथ जोडि कऽ पुछलनि— "हे महेश्वर! हम कोन पुण्य आ तपस्या कएने छलहुँ जाहि सँ अहाँ सन देवाधिदेव महादेव हमरा पतिक रूप मे प्राप्त भेलाह?"”

महत्व / परिचय

हरितालिका व्रत क महत्व कें बताबै वाला शिव आ पार्वती क बीच भेल दिव्य संवाद।

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“कैलासक रमनगर चोटी पर गौरी महादेव सँ पुछलखिन जे हम सुनए चाहैत छी से की अहाँ कहि सकैत छी? पार्वती कहलथिन— "कोन व्रत, कोन तपस्या अथवा कोन पूजा केलासँ स्त्रीगण भाग-सोहागवाली बनल रहैत छथि आ हुनक धियापुता जीबैत छनि?"”

महत्व / परिचय

मैथिली में सम्पूर्ण जितिया (जीमूतवाहन) व्रत कथा: गौरी-महादेव संवाद, पूजा विधि, चिलहोरि आ गिदरनी (शीलावती-कर्पूरावती) प्रसंग आ जीमूतवाहनक त्यागक कथा।

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“एक बेर नैमिषारण्य तीर्थ मे शौनकादि अठासी हजार ऋषिगण पुराणवेत्ता सूतजी सँ पुछलनि— "हे मुनिवर! कलियुग मे मनुष्य केँ अल्प प्रयास सँ मनोवांछित फल आ दुःख सँ मुक्ति कोना भेटत?"”

महत्व / परिचय

भगवान विष्णु क सत्यनारायण रूप क कथा। ई व्रत केनाइ परिवार मे सुख-शांति आ समृद्धि आनैत अछि। मिथिला मे ई कथाक विशेष महत्व अछि।

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“प्रत्येक पक्षक त्रयोदशी तिथिक संध्या काल (सूर्यास्त सँ सवा दू घड़ी धरि) केँ 'प्रदोष काल' कहल जाइत अछि। मान्यता अछि जे प्रदोष काल मे भगवान आशुतोष शंकर कैलाश पर्वतकेँ रजत भवन मे प्रसन्न मुद्रा मे नृत्य करैत छथि आ देवता लोकनि हुनकर स्तुति करैत छथि।”

महत्व / परिचय

प्रदोष व्रत क कथा, जे भगवान शिव आ पार्वती क पूजा लेल कएल जाइत अछि। ई समस्त पाप क नाश करैत अछि आ मनोकामना पूर्ण करैत अछि।

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“महाभारत काल मे जखन पांडव लोकनि द्यूत क्रीड़ा (जुआ) मे अपन राजपाट हारि कऽ वन मे कष्ट भोगि रहल छलाह, तखन धर्मराज युधिष्ठिर भगवान श्रीकृष्ण सँ पुछलनि— "हे मधुसूदन! एहि घोर विपत्ति आ वनवासक दुःख सँ मुक्त होएबाक तथा पुनः राज्य पयबाक कोनो उत्तम व्रत बताऊ।"”

महत्व / परिचय

ऋषि कौंडिन्य आ अनंत सूत्र-डोराक कथा। 14 गेंट 14 लोक क प्रतीक अछि। ई व्रत अपन कष्टक निवारण आ सुख-समृद्धि लेल कएल जाइत अछि।

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📖 कथा अंश

“नव विवाहइत याने वर्षाभ्यन्तरमे जाहि कन्याक विवाह भेल होइक ओ साओन वदि चौठ कऽ संध्या काल जाही, जूही, अगर, तगर, नीम दाड़िम तथा मेहदीक पात लोढ़ि कऽ राखथि। ता कन्याक अभिभाविका किंवा माय जाहि घरमे मधुश्रावणीक पूजा हेतैक, ओहि घरमे नीपि क' राखथि। तहन जाहिठाम पूजा हेतैक ओहिठाम पिठार सँ चौखूट क' अरिपन देथि। अरिपनमे पश्चिमसँ वर-कन्याक प्रवेश हेतु थोरेक बाट राखि देथि।”

महत्व / परिचय

मिथिलाक नव-विवाहिता कनियाँ लोकनि द्वारा साओन मासमे मनाओल जाएबला 13 दिनक पर्व। पूजाक सामिग्री, विधि, पाँचो बीनी आ सभ 13 दिनक कथा सम्मिलित अछि।

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📖 कथा अंश

“ई कथा श्रीमद्भागवत क नवम स्कंध क चतुर्थ अध्याय सँ लेल गेल अछि, जे ई सिद्ध करैत अछि जे भगवान क दरबार मे एकटा राजा आ एकटा परम तपस्वी ऋषि मे सँ, अहंकार रहित भक्त क स्थान कतेक ऊपर अछि।”

महत्व / परिचय

श्रीमद्भागवत क नवम स्कंध (चतुर्थ अध्याय) सँ उद्धृत भक्तराज अम्बरीष आ महर्षि दुर्वासा क पावन कथा, तथा मिथिला मे ४८ घण्टाक कठोर हरिवासल व्रतक महत्व आ चारि दिनक अनुष्ठान।

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