मिथिला चित्रकला (मधुबनी पेंटिंग)
मिथिला की विश्व-प्रसिद्ध लोक कला को जानें।
भरनी
A style characterized by rich, vibrant colors filling the subject outlines with no whitespace left.
कचनी
A monochromatic style using only fine lines and patterns, usually in black or red ink.
गोदना
Based on traditional body tattoos, consisting of concentric circles and simple geometric figures.
तांत्रिक
Depicts spiritual and metaphysical concepts deeply rooted in Tantra prowess of Mithila.
कोहबर
The most auspicious and central form of Mithila art, drawn on the walls of the nuptial chamber.
अरिपन
Tantric and Vedic geometric floor diagrams drawn with Pithar (rice paste) using fingers before every Maithil ritual, vrat, and sanskar.
अरिपन (अल्पना): मिथिला के पवित्र पिठार मंडल
प्रत्येक पर्व, व्रत और संस्कार से पूर्व मैथिल महिलाओं द्वारा आंगन में पिठार (चावल के घोल) और सिंदूर से उंगलियों द्वारा बनाए जाने वाले तांत्रिक व वैदिक अरिपन।
अष्टदल कमल अरिपन
सत्यनारायण पूजा, कलश स्थापना एवं विष्णु-लक्ष्मी पूजन
ब्रह्मांड के विस्तार और आठों दिशाओं (अष्ट-दिक्पाल) के संतुलन तथा श्री विष्णु-लक्ष्मी के आसन का प्रतीक।
तुषारी पूजा अरिपन
मकर संक्रांति से फाल्गुन संक्रांति तक कुंवारी कन्याओं द्वारा गौरी पूजन
प्रातःकाल मंदिर, सूर्य, चंद्रमा और नवग्रह की आकृति बनाकर भगवान शिव के समान सुयोग्य वर की कामना।
कोजागरा एवं लक्ष्मी-पीठ अरिपन
शरद पूर्णिमा (कोजागरा रात्रि) एवं नवविवाहित वर का चुमाओन
घर के आंगन में प्रवेश करती हुईं माता लक्ष्मी के चरण-चिह्न, मखाना, पान और पचीसी के पासे का चित्रण।
मधुश्रावणी चौखूट एवं नाग-नागिन अरिपन
श्रावण मास का १४ दिवसीय मधुश्रावणी महापर्व
पश्चिम से प्रवेश द्वार वाला चौकोर घेरा, उत्तर-दक्षिण में पुरहर-पातिल के दो गोल घेरे तथा पंच नाग-कन्याओं (विषहरि) का स्थान।
दशपात एवं संस्कार अरिपन (मुंडन/उपनयन)
मुंडन, उपनयन (जनेऊ) एवं मातृका पूजन
दसों दिशाओं की रक्षा और बरुआ/शिशु की दीर्घायु के लिए दस पवित्र पत्तों की ज्यामितीय आकृति।
षष्ठी (छठी) एवं संझा-बाती अरिपन
दैनिक संध्या तुलसी-आंगन दीपदान एवं छठी संस्कार
तुलसी चौरा और आंगन की देहरी पर संध्या दीप रखने हेतु त्रिकोण (शक्ति) और कमल कली का अंकन।