मिथिला चित्रकला (मधुबनी पेंटिंग)

मिथिला की विश्व-प्रसिद्ध लोक कला को जानें।

पवित्र भूमि अलंकरण

अरिपन (अल्पना): मिथिला के पवित्र पिठार मंडल

प्रत्येक पर्व, व्रत और संस्कार से पूर्व मैथिल महिलाओं द्वारा आंगन में पिठार (चावल के घोल) और सिंदूर से उंगलियों द्वारा बनाए जाने वाले तांत्रिक व वैदिक अरिपन।

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अष्टदल कमल अरिपन

🪔 प्रमुख अवसर व संस्कार

सत्यनारायण पूजा, कलश स्थापना एवं विष्णु-लक्ष्मी पूजन

ब्रह्मांड के विस्तार और आठों दिशाओं (अष्ट-दिक्पाल) के संतुलन तथा श्री विष्णु-लक्ष्मी के आसन का प्रतीक।

मुख्य प्रतीक:
८ सममित कमल दलमध्य में सिंदूर बिंदुबाहरी सुरक्षा घेरा
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तुषारी पूजा अरिपन

🪔 प्रमुख अवसर व संस्कार

मकर संक्रांति से फाल्गुन संक्रांति तक कुंवारी कन्याओं द्वारा गौरी पूजन

प्रातःकाल मंदिर, सूर्य, चंद्रमा और नवग्रह की आकृति बनाकर भगवान शिव के समान सुयोग्य वर की कामना।

मुख्य प्रतीक:
मंदिर शिखर आकृतिसूर्य एवं अर्धचंद्रनवग्रह के ९ बिंदु
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कोजागरा एवं लक्ष्मी-पीठ अरिपन

🪔 प्रमुख अवसर व संस्कार

शरद पूर्णिमा (कोजागरा रात्रि) एवं नवविवाहित वर का चुमाओन

घर के आंगन में प्रवेश करती हुईं माता लक्ष्मी के चरण-चिह्न, मखाना, पान और पचीसी के पासे का चित्रण।

मुख्य प्रतीक:
लक्ष्मी चरण-चिह्नपचीसी चौपड़मखाना एवं पान पत्ता
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मधुश्रावणी चौखूट एवं नाग-नागिन अरिपन

🪔 प्रमुख अवसर व संस्कार

श्रावण मास का १४ दिवसीय मधुश्रावणी महापर्व

पश्चिम से प्रवेश द्वार वाला चौकोर घेरा, उत्तर-दक्षिण में पुरहर-पातिल के दो गोल घेरे तथा पंच नाग-कन्याओं (विषहरि) का स्थान।

मुख्य प्रतीक:
चौखूट अरिपन घेरापुरहर-पातिल के दो वृत्तमैना पात आसन
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दशपात एवं संस्कार अरिपन (मुंडन/उपनयन)

🪔 प्रमुख अवसर व संस्कार

मुंडन, उपनयन (जनेऊ) एवं मातृका पूजन

दसों दिशाओं की रक्षा और बरुआ/शिशु की दीर्घायु के लिए दस पवित्र पत्तों की ज्यामितीय आकृति।

मुख्य प्रतीक:
१० पवित्र पत्र दलबांस वंश-रेखामध्य में स्वस्तिक
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षष्ठी (छठी) एवं संझा-बाती अरिपन

🪔 प्रमुख अवसर व संस्कार

दैनिक संध्या तुलसी-आंगन दीपदान एवं छठी संस्कार

तुलसी चौरा और आंगन की देहरी पर संध्या दीप रखने हेतु त्रिकोण (शक्ति) और कमल कली का अंकन।

मुख्य प्रतीक:
त्रिकोण (शक्ति प्रतीक)सिंदूर टीकदेहरी रेखा