मिथिला पंचांग

मैथिली पंचांग सौर कैलेंडर से अलग है। नया साल मेष संक्रांति (जुड़ शीतल) से शुरू होता है।

शुक्रवार, 8 मई 2026
🪔आज का पंचांग🪔
मासजेठ
तिथिPanchami (पंचमी) (May 7, 10:14 AM - May 8, 12:22 PM)
नक्षत्रDhanishta (धनिष्ठा)
पक्षकृष्ण (कृष्ण पक्ष)
योगVajra (वज्र)
करणVanija (वणिज)
🌅
सूर्योदय06:45 AM
🌇
सूर्यास्त05:20 PM
⚠️अशुभ समय
राहु काल10:43 AM - 12:02 PM
यमगण्ड6:45 AM - 8:04 AM
गुलिक काल9:23 AM - 10:43 AM
पंचक
लगन (मुहूर्त)

बारह महीने

  • बैशाखअप्रैल - मई
  • जेठमई - जून
  • असाढ़जून - जुलाई
  • साओनजुलाई - अगस्त
  • भादोअगस्त - सितंबर
  • आसिनसितंबर - अक्टूबर
  • कातिकअक्टूबर - नवंबर
  • अगहननवंबर - दिसंबर
  • पूसदिसंबर - जनवरी
  • माघजनवरी - फरवरी
  • फगुनफरवरी - मार्च
  • चैतमार्च - अप्रैल

महत्व

कैलेंडर कृषि, त्योहारों और शादियों के लिए तारीखें तय करता है। मिथिला में 'सौराठ सभा' की एक अनूठी प्रणाली है, जहाँ 'पंजी प्रबंध' (वंशावली रिकॉर्ड) के आधार पर शादियों पर बातचीत की जाती है, जिसे अक्सर पंचांग के खिलाफ देखा जाता है।


संरचना

यह एक चंद्र-सौर कैलेंडर है। तिथियों की गणना चंद्रमा की स्थिति के आधार पर की जाती है। हालाँकि, नया साल (जुड़ शीतल) सौर है, जो मेष राशि में सूर्य के प्रवेश को दर्शाता है।

विशिष्ट विशेषताएँ

  • उष्णकटिबंधीय सौर

    कई चंद्र-सौर कैलेंडरों के विपरीत, मैथिली वर्ष 'मेष संक्रांति' (मध्य अप्रैल) से शुरू होता है, जो सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के साथ मेल खाता है।

  • ज्योतिषीय सटीकता

    यह 'सौराठ सभा' के लिए सटीक समय निर्धारित करता है, जहां 'पंजी' (वंशावली रिकॉर्ड) के आधार पर विवाह तय किए जाते हैं।

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