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700 Years of Verified Lineage

मिथिला पंजी प्रबंध एवं गोत्र-मूल निर्देशिका

१३२६ ई. में महाराजा हरिसिंहदेव द्वारा स्थापित मिथिलांचल की सात सौ वर्ष पुरानी वंशावली व्यवस्था का अन्वेषण करें।

गोत्र अनुसार चुनें:

शांडिल्य

4 प्रमुख मूल

मूल ऋषि: महर्षि शांडिल्य

वैदिक प्रवरशांडिल्य, असित, देवल
वेद एवं शाखासामवेद / शुक्ल यजुर्वेद (कौथुम / माध्यन्दिन)

शांडिल्यप्रमुख मूल & Historical Centers

गंगौली
गंगौली, मधुबनी (मधुबनी)
Mool

संस्कृत न्यायशास्त्र, धर्मशास्त्र और मीमांसा के विद्वानों के लिए ऐतिहासिक रूप से प्रसिद्ध।

शाखाएं / डेरा
भाटसिमरीभैरवगंजहरदी
खरौड़े
खरौरा / पंडौल (मधुबनी)
Mool

कर्नाट और ओइनिवार राजवंशों के वैदिक कर्मकांडी और पारंपरिक दरबारी विद्वान।

शाखाएं / डेरा
उजानसुक्की
बुधवाल
बुधवाल / बहेड़ा (दरभंगा)
Mool

वैदिक पारायण और पारंपरिक ज्योतिषीय पंचांग गणना के संरक्षक।

शाखाएं / डेरा
बहेड़ापचरुखी
नरूआर
नरूआर, झंझारपुर (मधुबनी)
Mool

नव्य-न्याय शास्त्रार्थ और शास्त्रीय मैथिली साहित्य के संरक्षक।

शाखाएं / डेरा
लालगंजसिमरा

कश्यप

3 प्रमुख मूल

मूल ऋषि: महर्षि कश्यप

वैदिक प्रवरकश्यप, अवत्सार, नैध्रुव
वेद एवं शाखाशुक्ल यजुर्वेद (वाजसनेयि माध्यन्दिन)

वत्स

2 प्रमुख मूल

मूल ऋषि: महर्षि भृगु / वत्स

वैदिक प्रवरभार्गव, च्यावन, आप्नवान, और्व, जामदग्न्य
वेद एवं शाखाशुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन)

भारद्वाज

1 प्रमुख मूल

मूल ऋषि: महर्षि भारद्वाज

वैदिक प्रवरआंगिरस, बार्हस्पत्य, भारद्वाज
वेद एवं शाखाशुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन)

सावर्ण्य

1 प्रमुख मूल

मूल ऋषि: महर्षि सावर्णि

वैदिक प्रवरभार्गव, वैतहव्य, सावेदस
वेद एवं शाखाशुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन)

पाराशर

1 प्रमुख मूल

मूल ऋषि: महर्षि पाराशर

वैदिक प्रवरवशिष्ठ, शाक्त्य, पाराशर
वेद एवं शाखाशुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन)

गौतम

1 प्रमुख मूल

मूल ऋषि: महर्षि अक्षपाद गौतम

वैदिक प्रवरआंगिरस, आयास्य, गौतम
वेद एवं शाखाशुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन)

पंजी व्यवस्था के आधारभूत नियम

1

असपिंड नियम (रक्त संबंध निषेध)

आनुवंशिक शुचिता और स्वास्थ्य के लिए पितृ पक्ष में ७ पीढ़ी और मातृ पक्ष में ५ पीढ़ी तक वैवाहिक संबंध पूर्णतः वर्जित हैं।

2

सिद्धांत एवं अधिकार पत्र

विवाह से पूर्व अधिकृत पंजिकार ताड़पत्रों पर अंकित वंशावली की गहन जांच कर "सिद्धांत पत्र" जारी करते हैं।

3

सौरठ सभा गाछी सम्मेलन

मधुबनी के सौरठ में आम के बगीचों में आयोजित होने वाली ऐतिहासिक वार्षिक सभा, जहाँ पंजिकारों की उपस्थिति में संबंध निश्चित होते हैं।