मिथिला धरोहर शिल्प एवं जीआई शिल्पी मंच
हमारे विश्व-प्रसिद्ध भौगोलिक उपदर्शन (GI) हस्तशिल्प का संरक्षण और आपको सीधे प्रामाणिक ग्रामीण कारीगर समूहों से जोड़ना।

मधुबनी / मिथिला चित्रकला
रांती और जितवारपुर की जीआई पंजीकृत लोक कला
प्राकृतिक रंगों (काजल, हल्दी, नील, कुसुम) और बांस की सींकों से निर्मित, जिसमें भरनी, कछनी, तांत्रिक, गोदना और कोहबर शैलियाँ सम्मिलित हैं।

सिक्की गोल्डन ग्रास हस्तशिल्प
मिथिला की दलदली सुनहरी घास से निर्मित पर्यावरण-अनुकूल कला
महिला शिल्पियों द्वारा सुनहरी जंगली घास से हाथ से बुनी गई पारंपरिक पौती (दहेज डलिया), मूर्तियां और सजावटी वस्तुएं।

मिथिला मखाना (फॉक्स नट्स)
मिथिला के प्राचीन पोखरों से प्राप्त विश्व-प्रसिद्ध सुपरफूड
पोखरों में हाथ से गोता लगाकर निकाला जाने वाला मखाना, जिसकी विश्व में ८५% से अधिक आपूर्ति अकेले मिथिलांचल से होती है।

सुजनी रजाई एवं कथात्मक कढ़ाई
कपड़ों पर धागों से लोक कथाएं उकेरने वाली प्राचीन कढ़ाई कला
माताओं द्वारा नवजात शिशुओं के लिए कोमल सूती साड़ियों को जोड़कर बनाई जाने वाली कथात्मक रजाई और दीवार परदे।
विशेष कलाकृति या थोक आदेश हेतु संपर्क
बिचौलियों के बिना सीधे प्रमाणित मिथिला शिल्पी समूहों से जुड़कर हमारी पारंपरिक कला का सहयोग करें।