वापस (व्रत कथा)
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सावित्री व्रत कथा

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सावित्री व्रत कथा

भद्र देश के महाराज अश्वपति बड़े धर्मात्मा और प्रजापालक थे, परंतु उनकी कोई संतान नहीं थी। पराशर मुनि के उपदेश से उन्होंने गायत्री अनुष्ठान किया और देवी की कृपा से उन्हें सावित्री नाम की कन्या प्राप्त हुई।

सावित्री सर्वगुण संपन्न थीं। विवाह योग्य होने पर उन्होंने स्वयं अपना वर चुनने की अनुमति माँगी। वन में उनकी भेंट सत्यवान से हुई, जो राजा द्युमत्सेन के पुत्र थे। सावित्री ने उन्हें ही अपना पति चुना। नारद मुनि ने बताया कि सत्यवान की आयु केवल एक वर्ष शेष है, परंतु सावित्री अपने निर्णय पर अटल रहीं।

एक वर्ष बाद जब सत्यवान की मृत्यु का समय आया, तो वे वन में अचेत हो गए। यमराज उनके प्राण लेकर जाने लगे, तो सावित्री उनके पीछे चल दीं। अपनी बुद्धिमानी और मधुर बातों से उन्होंने यमराज को प्रसन्न किया। यमराज ने उन्हें वरदान दिए: उनके सास-ससुर की आँखों की रोशनी, उनका राज्य और स्वयं के लिए पुत्र प्राप्ति। सावित्री ने चतुरता से यमराज को याद दिलाया कि बिना पति के वह माता कैसे बन सकती हैं। यमराज ने प्रसन्न होकर सत्यवान के प्राण वापस कर दिए।

बरसाइत पावनि की कथा: नाग-नागिन और विद्वान ब्राह्मण

मिथिला के एक गाँव में एक ब्राह्मणी ने गलती से गरम मछली एक बिल में डाल दी, जिससे नाग-नागिन के सात अंडे नष्ट हो गए। नागिन ने ब्राह्मण के सातों बेटों को डसने की प्रतिज्ञा की। पाँच बेटों की मृत्यु उसी बरगद के नीचे हुई जहाँ साँप रहने लगे थे। सबसे छोटा बेटा जब यात्रा पर था, तो उसने एक चतुर कन्या से विवाह किया। वट सावित्री के दिन, उसी पेड़ के नीचे पहुँचने पर दुल्हन ने अपनी बुद्धिमानी से नाग को वश में किया और नागिन से अपने सातों देवरों के प्राण वापस माँग लिए। उसकी चतुराई से पूरे परिवार की रक्षा हुई।

सामग्री और विधि

सामग्री: 8 पंखे (बिअनी), 8 डालियाँ, बोहनी, सूत, 14 उड़द दाल के बड़े, मिट्टी के नाग-नागिन, केला का पत्ता, दही, मूँग, चना, लाल कपड़ा आदि।

विधि: एक दिन पहले अरवा भोजन करें। शाम को गौरी की स्थापना करें। पूजा के दिन नए वस्त्र पहनकर बरगद के पेड़ के पास जाएँ। वहाँ अरिपन बनाकर पूजा करें, बिन्नी हाथ में लेकर कथा सुनें। इसके बाद पेड़ की पाँच बार परिक्रमा करते हुए कच्चा सूत बाँधें। अंत में बड़ों का आशीर्वाद लें।

अर्थ

सावित्री व्रत की संपूर्ण मार्गदर्शिका: सावित्री-सत्यवान और नाग-नागिन की कथा, साथ ही विस्तृत पूजा विधि और सामग्री।

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