प्रमुख स्थल

इतिहास आ आध्यात्मिकता क गलियारा में चलू।

जनकपुरधाम
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जनकपुरधाम

📍 नेपाल

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सीतामढ़ी
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सीतामढ़ी

📍 बिहार, भारत

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मधुबनी
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मधुबनी

📍 बिहार, भारत

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दरभंगा
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दरभंगा

📍 बिहार, भारत

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अहिल्या स्थान
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अहिल्या स्थान

📍 दरभंगा, भारत

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सिमरौनगढ़
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सिमरौनगढ़

📍 नेपाल

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वैशाली
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वैशाली

📍 बिहार, भारत

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सिंहेश्वर स्थान
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सिंहेश्वर स्थान

📍 मधेपुरा, भारत

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कुशेश्वर स्थान
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कुशेश्वर स्थान

📍 दरभंगा, भारत

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मंदार हिल
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मंदार हिल

📍 बांका (प्राचीन मिथिला सीमा)

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आन्ध्रा ठाढ़ी
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आन्ध्रा ठाढ़ी

📍 मधुबनी, भारत

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मकरमपुर हनुमान मंदिर
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मकरमपुर हनुमान मंदिर

📍 दरभंगा, भारत

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बोनही महादेव (धरौरा)
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बोनही महादेव (धरौरा)

📍 धरौरा, बेनीपुर, दरभंगा

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नर्मदेश्वर नाथ (पंडौल)
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नर्मदेश्वर नाथ (पंडौल)

📍 पंडौल, मधुबनी

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अम्नेश्वर नाथ (सुरसंड)
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अम्नेश्वर नाथ (सुरसंड)

📍 अमाना, सुरसंड, सीतामढ़ी

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गांडीवेश्वर नाथ (शिवनगर)
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गांडीवेश्वर नाथ (शिवनगर)

📍 शिवनगर, बेनीपट्टी, मधुबनी

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बलिराजगढ़
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बलिराजगढ़

📍 मधुबनी, बिहार, भारत

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हरेश्वरनाथ मंदिर
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हरेश्वरनाथ मंदिर

📍 मधुबनी, बिहार

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Rural Heritage

कला आ ज्ञान क गाम

मिथिलाक आत्मा गाम मे बसैत अछि, जाहि ठाम हर गामक अपन एकटा विशिष्ट कला आ परम्परा अछि।

जितवारपुर

📍 मधुबनी

बिहार क पहिल 'शिल्प ग्राम'। सीता देवी आ बौआ देवी सन पद्मश्री कलाकारक घर। भरनी आ कचनी शैलीक लेल प्रसिद्ध।

#जितवारपुर#मधुबनी आर्ट विलेज#पद्मश्री कलाकार
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रांटी

📍 मधुबनी

'कचनी' (Line Work) शैलीक केंद्र। महासुन्दरी देवीक लेल जानल जायत अछि। गामक हर देबाल पर कलाक बास अछि।

#रांटी#महासुन्दरी देवी#कचनी शैली
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मंग्रौनी

📍 मधुबनी

तंत्र आ ज्योतिष सं जुड़ल एक प्राचीन गाम। एतय ११ एकादश रुद्र मंदिर स्थापित अछि, जे अदभुत अछि।

#मंग्रौनी#एकादश रुद्र#तंत्र साधना
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बिस्फी

📍 मधुबनी

मिथिलाक शेक्सपियर, महाकवि विद्यापतिक जन्मस्थान। साहित्य प्रेमियोंक लेल एक तीर्थस्थल।

#बिस्फी#विद्यापति जन्मभूमि#मैथिली साहित्य
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पिलखवाड़

📍 मधुबनी

संस्कृत शिक्षा आ प्राचीन पाण्डुलिपिक लेल प्रसिद्ध। ई पारंपरिक मिथिलाक बौद्धिक शिखरक प्रतिनिधित्व करैत अछि।

#पिलखवाड़#संस्कृत पांडुलिपि#विद्वान केंद्र
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झंझारपुर

📍 मधुबनी

उच्च गुणवत्ता बला मखान उत्पादन आ ऐतिहासिक चंद्रेश्वर स्थान मंदिर लेल प्रसिद्ध एकटा प्रमुख आर्थिक केंद्र।

#झंझारपुर#मखान केंद्र#चंद्रेश्वर स्थान
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सकरी

📍 मधुबनी

एकटा ऐतिहासिक व्यापारिक केंद्र आ रेलवे जंक्शन, जे अपन पारंपरिक मिठाई क दुकान आ क्षेत्रीय संपर्क मे भूमिका लेल प्रसिद्ध अछि।

#सकरी#मिथिलाक मिठाई#सकरी जंक्शन
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बहेड़ा

📍 दरभंगा

एकटा ऐतिहासिक रूप सँ महत्वपूर्ण शहर जे प्रतिष्ठित बहेड़ा कॉलेज आ मिथिला मे ग्रामीण शिक्षा मे अपन योगदान लेल जानल जाइत अछि।

#बहेड़ा#बहेड़ा कॉलेज#ग्रामीण शिक्षा मिथिला
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🪔 शक्ति उपासना (धाम)

शक्ति क बिना मिथिला क कल्पना नहि कयल जा सकैत अछि।

उग्रतारा स्थान - महिषी मे माता उग्रतारा क प्राचीन शक्तिपीठ

उग्रतारा स्थान

📍 महिषी, सहरसा

सहरसा जिलाक महिषी गाम मे अवस्थित उग्रतारा स्थान, मिथिला क्षेत्रक सभ सँ महत्वपूर्ण आ आध्यात्मिक रूप सँ शक्तिशाली शक्ति पीठ मे सँ एक अछि। हिंदू तांत्रिक परंपरा मे दस महाविद्या मे सँ दोसर, देवी उग्रतारा केँ समर्पित ई मंदिर गूढ़ आध्यात्मिक साधना क' एकटा पैघ केंद्र थीक। मानल जाइत अछि जे एहि ठाम देवी सतीक 'बाँय आँखि' खसल छल। केंद्रीय गर्भगृह मे देवीक १.६ मीटर ऊँच कारी पत्थरक मूर्ति अछि, जकर दुनू दिस एकजटा आ नील सरस्वतीक रूप मे हुनकर अन्य दूटा स्वरूप विराजमान छथि। महिषीक भारतीय बौद्धिक इतिहास मे एकटा विशेष स्थान अछि, कियाक तँ ई महान दार्शनिक मंडन मिश्र आ आदि शंकराचार्यक बीच भेल ऐतिहासिक 'शास्त्रार्थ' क' स्थल थीक। नवरात्रि क' समय एहि ठाम तांत्रिक साधक आ भक्त सभक पैघ भीड़ उमड़ैत अछि।

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जयमंगला गढ़ - कांवर झील क कात मे स्थित प्राचीन शक्तिपीठ

जयमंगला गढ़

📍 बेगूसराय

जयमंगला गढ़ बेगूसराय मे कांवर झील क' कात मे अवस्थित एकटा ऐतिहासिक आ आध्यात्मिक गढ़ अछि, जे मिथिलाक प्राचीन 'गढ़' संस्कृतिक प्रमाण थीक। ई स्थल मुख्य रूप सँ देवी चंडी मंगला केँ समर्पित अपन प्राचीन मंदिर लेल पूजनीय अछि, आ एकरा ओहि ५२ शक्तिपीठ मे सँ एक मानल जाइत अछि जतय देवी सतीक कोनो अंग खसल छल। ई मंदिर एकटा विशाल पुरातात्विक टीला क' ऊपर बनल अछि, जतय सँ ५वीं शताब्दी ईसा पूर्व क' अवशेष भेटल अछि। जयमंगला गढ़ मे पूजाक एकटा खास बात 'रक्तहीन' बलिक परंपरा अछि, जतय देवी केँ पशु बलिक बदला मे फूल, मिठाई आ पवित्र जल चढ़ाओल जाइत अछि। मंदिरक आध्यात्मिक वातावरण कांवर पक्षी अभयारण्यक प्राकृतिक सुंदरता सँ और बढ़ि जाइत अछि।

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नवादा भगवती स्थान - राजा हयहट्टा द्वारा स्थापित प्राचीन मंदिर

नवादा भगवती स्थान (हयहाट्टा)

📍 दरभंगा, बिहार, भारत

नवादा भगवती स्थान, जकरा ऐतिहासिक रूप सँ दरभंगाक 'हयहाट्टा' परम्परा सँ जोड़ल जाइत अछि, मिथिलाक सभ सँ प्राचीन आ जागृत शक्तिपीठ सभ मे सँ एक अछि। एहि मंदिरक स्थापना ६०० वर्ष पहिने राजा हयहाट द्वारा कएल गेल छल। पौराणिक गाथाक अनुसार, एहि ठाम माता सतीक 'बाँय कान' खसल छल, जकर कारणे एकर धार्मिक महत्व अद्वितीय अछि। मंदिरक गर्भ गृह मे माताक 'कान' रूपी शिलाक पूजा कएल जाइत अछि। तांत्रिक साधना लेल ई एकटा अति सिद्ध स्थल थीक। राज दरभंगाक समय सँ ल' क' आई धरि एहि ठामक शक्ति उपासना श्रद्धाक मुख्य केंद्र अछि।

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मिथिला धरोहर: विरासत आ स्मारक

मिथिलाक ऐतिहासिक विरासत आ अद्भुत वास्तुकलाक एकटा यात्रा।

नवलखा पैलेस - राजनगर क भव्य महल खंडहर

नवलखा पैलेस (राजनगर)

राजनगर (मधुबनी) मे अवस्थित नवलखा पैलेसकें 'मिथिलाक ताज महल' कहल जाइत अछि। महाराजा रामेश्वर सिंह द्वारा बनल ई महल स्थापत्य कलाक अनुपम उदाहरण थिक। १९३४ क विनाशकारी भूकंप मे एकर बेसी भाग खंडहर मे बदलि गेल, मुदा आजुओ एकर भव्य मेहराब आ स्तंभ दरभंगा राजक वैभवक कथा कहैत अछि। एहि ठामक मंदिर आ ओकर दीवार पर कएल गेल नक्काशी कलाकार सभक कुशलताक प्रमाण अछि। ई स्थल मिथिलाक वास्तुकला आ सांस्कृतिक गौरव क' एकटा पैघ स्रोत अछि।

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दरभंगा किला - दरभंगा राज क विशाल लाल किला

दरभंगा किला

दरभंगा किला, जकरा 'राज किला' सेहो कहल जाइत अछि, खंडवाला राजवंश (दरभंगा राज) क शौर्य आ समृद्धिक प्रतीक थिक। एकर विशाल लाल दीवारें दिल्लीक लाल किला सँ प्रेरित अछि। ८५ एकड़ मे पसरल एहि किला मे कतेको भव्य महल, मंदिर आ बगीचा छल। किला मे अवस्थित 'सिंह द्वार' एकर मुख्य आकर्षण अछि। ई किला न केवल एकटा रक्षात्मक संरचना छल, बल्कि ई मिथिलाक बौद्धिक आ सांस्कृतिक गतिविधियक केंद्र सेहो रहल अछि। कतेको दशक धरि ई किला क्षेत्रक राजनीति आ प्रशासनक धुरी रहल।

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श्यामा माई मंदिर - चिता पर बनल भव्य काली मंदिर

श्यामा माई मंदिर

दरभंगा राज परिसर मे अवस्थित श्यामा माई मंदिर मिथिलाक सभ सँ जाग्रत आ सिद्ध तांत्रिक शक्तिपीठ सभ मे सँ एक अछि। ई मंदिर महाराजा रामेश्वर सिंहक चिता पर बनाओल गेल अछि, जे एकरा विश्वक अन्य मंदिर सभ सँ अलग आ विशेष बनाबैत अछि। मंदिरक गर्भ गृह मे माँ कालीक (श्यामा) अत्यंत विहंगम आ दिव्य प्रतिमा अछि। मानल जाइत अछि जे श्यामा माईक शरण मे अएला पर भक्तक हर मनोकामना पूरा होइत अछि। एहि ठामक आरती आ संध्या समयक आध्यात्मिक वातावरण भक्त सभ कें मंत्रमुग्ध क' दैत अछि। मिथिलाक लोक मानैत छथि जे ई मंदिर क्षेत्रक रक्षक थिक।

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बलिराजगढ़ - प्राचीन विदेह राज्य क पुरातात्विक अवशेष

बलिराजगढ़

मधुबनी जिलाक बाबूबरही प्रखंड मे अवस्थित बलिराजगढ़, मिथिलाक सभ सँ प्राचीन आ महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल थिक। इतिहासकार आ पुरातत्वविद् एकरा प्राचीन विदेह राज्यक राजधानी वा कोनो पैघ प्रशासनिक केंद्र मानैत छथि। उत्खनन मे एहि ठाम सँ मौर्य काल आ गुप्त कालक कतेको अवशेष भेटल अछि, जइ मे विशाल प्राचीर (बाउंड्री वाल) आ ईंटक संरचना शामिल अछि। 'राजा बलि' क' गढ़ क' रूप मे प्रसिद्ध ई स्थल मिथिलाक प्राचीनता कें रेखांकित करैत अछि। बलिराजगढ़क संरक्षण आ गहीर शोध मिथिलाक हराएल इतिहास कें पुनर्स्थापित करय मे सहायक भ' सकैत अछि।

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बिसफी - महाकवि विद्यापति क ऐतिहासिक डीह

बिसफी (विद्यापति डीह)

मधुबनी जिलाक बिसफी गाम, महाकवि विद्यापतिक जन्मस्थली क' रूप मे संपूर्ण मिथिला लेल एकटा पावन तीर्थ थिक। 'विद्यापति डीह' ओही ऐतिहासिक स्थान अछि जतय कविक पैतृक आवास छल। मानल जाइत अछि जे विद्यापतिक भक्ति सँ प्रसन्न भ' भगवान शिव 'उगना' क' रूप ध' क' हुनक चाकरी करय अएलाह। आजुओ बिसफी आ ओकर आसपासक कण-कण मे विद्यापतिक पदावली आ शिव भक्ति गुंजायमान अछि। ई स्थान केवल साहित्य प्रेमी सभ लेल नहि, बल्कि आध्यात्मिक खोज मे लागल साधक सभ लेल सेहो प्रेरणाक केंद्र अछि।

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उच्चैठ भगवती - कालिदास क ज्ञान स्थली आ शक्तिपीठ

उच्चैठ भगवती

मधुबनी जिलाक बेनिपट्टी मे अवस्थित 'उच्चैठ भगवती' मंदिर मिथिलाक सभ सँ पावन शक्तिपीठ सभ मे सँ एक अछि। ई स्थान महाकवि कालीदासक 'ज्ञान-स्थली' क' रूप मे विश्वविख्यात अछि। पौराणिक मान्यता अछि जे कालीदास जे कहियो महामूर्ख छलाह, एही ठाम माता भगवतीक कृपा सँ परम विद्वान बनलाह। मंदिर मे माँ छिन्नमस्ताक स्वरूप विराजमान अछि। एहि ठामक प्रतिमा मे माताक धड़ अछि मुदा माथ नहि, जे एकटा रहस्यमय आ तांत्रिक अनुभूति दैत अछि। नवरात्रि आ वसंत पंचमी क' समय एहि ठाम कतेको साधक अपन इच्छित सिद्धि आ बुद्धि लेल माँक आराधना करय अबैत छथि।

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हाथी किला - राजनगर मे पत्थर क हाथी वाला प्रवेश द्वार

हाथी किला (नवलखा पैलेस)

राजनगर (मधुबनी) मे अवस्थित हाथी किला, जकरा नागर किला सेहो कहल जाइत अछि, दरभंगा राजक वास्तुकलाक एकटा भव्य अवशेष थिक। एकर प्रवेश द्वार पर बनल विशाल पत्थरक हाथीक मूर्तियां एकरा ई विशिष्ट नाम दैत अछि। ई किला महाराजा रामेश्वर सिंहक महल परिसरक हिस्सा छल। भले ही आई ई खंडहरक रूप मे अछि, मुदा एकर भितर बनल चित्रकारी आ नक्काशी आजुओ दर्शक सभ कें चकित क' दैत अछि। ई स्थल मिथिलाक राजसी वैभव आ स्थापत्य कलाक गवाह थिक।

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सौराठ सभा - पारंपरिक मैथिल विवाहक ऐतिहासिक स्थल

सौराठ सभा गाछी

मधुबनी जिलाक सौराठ गाम मे अवस्थित 'सभा गाछी' मिथिलाक एकटा अद्वितीय सामाजिक आ सांस्कृतिक स्थल थिक। सदियों सँ एहि ठाम मैथिल ब्राह्मण सभक विवाह लेल विशाल सभा लगैत आबि रहल अछि। 'पंजी-प्रबंध' क' माध्यम सँ वंशावलीक शुद्धता जाँची जाइत अछि आ विवाह तय कएल जाइत अछि। आमक एहि विशाल बगीचा मे लागय वला ई सभा मिथिलाक सुसंगठित सामाजिक व्यवस्थाक जीता-जागता उदाहरण थिक। ई परंपरा आजुओ मिथिलाक पहचानक अटूट हिस्सा अछि।

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गिरिजा स्थान - रामायण कालीन पुष्प वाटिका आ सीता राम मिलन स्थल

गिरिजा स्थान (फुलहर)

मधुबनी जिलाक फुलहर गाम मे अवस्थित 'गिरिजा स्थान' रामायण कालक एकटा अत्यंत पवित्र स्थल थिक। मानल जाइत अछि जे ई ओही प्राचीन पुष्प-वाटिका अछि जतय माता सीता आ भगवान रामक प्रथम मिलन भेल छल। सीता एहि ठाम माँ गिरिजा (पार्वती) क पूजा करय अबैत छलीह। आजुओ भक्तगण एहि ठाम वइह त्रेता युगीन ऊर्जा महसूस करैत छथि। विशेष रूप सँ मिथिलाक कनिया सभ अपन सुखद दाम्पत्य जीवन लेल माँ गिरिजाक आशीर्वाद लेबय अबैत छथि।

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चामुंडा स्थान - दरभंगा राज क कुलदेवी आ तांत्रिक शक्तिपीठ

चामुंडा स्थान

दरभंगा राज परिसर मे अवस्थित चामुंडा स्थान, मिथिलाक राज-परम्परा आ तंत्र-साधनाक एकटा गहीर केंद्र थिक। महाराजा दरभंगाक कुलदेवीक रूप मे पूजित माँ चामुंडाक ई मंदिर अपन विशिष्ट तांत्रिक ऊर्जा लेल जानल जाइत अछि। मंदिरक संरचना आ एहि ठाम संपन्न होय वला अनुष्ठान मिथिलाक प्राचीन आगम परंपरा कें जीवंत रखैत अछि। विशेष रूप सँ शारदीय नवरात्र मे एहि ठाम भक्त सभक अपार भीड़ उमड़ैत अछि, जखन पूरा वातावरण माँक जयघोष सँ गुंजायमान रहैत अछि।

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प्रशासनिक संरचना

मिथिला क आधुनिक शासन व्यवस्था प्रमंडल मे विभाजित अछि।

तिरहुत प्रमंडल

HQ: मुजफ्फरपुर

विदेह राज्य क ऐतिहासिक हृदय। एहि मे वैशाली (प्रथम गणतंत्र) आ चंपारण (सत्याग्रह भूमि) शामिल अछि।

Districts:

मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी, शिवहर, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण

#तिरहुत कमिश्नर#मुजफ्फरपुर स्मार्ट सिटी#वैशाली पर्यटन

दरभंगा प्रमंडल

HQ: दरभंगा

मिथिला क सांस्कृतिक राजधानी। राज दरभंगा, संस्कृत शिक्षा, आ मधुबनी पेंटिंग क केंद्र।

Districts:

दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर

#दरभंगा राज#मिथिला विश्वविद्यालय#दरभंगा एयरपोर्ट

कोसी प्रमंडल

HQ: सहरसा

कोसी नदी सँ प्रभावित क्षेत्र। ई विशिष्ट लोक परंपरा आ व्यापक मिथिला संस्कृति क संगम अछि। सिंहेश्वर स्थान क लेल प्रसिद्ध।

Districts:

सहरसा, मधेपुरा, सुपौल

#कोसी नदी#सिंहेश्वर स्थान#सहरसा मिथिला

नदी आ पर्यावरण

मिथिलाक भौगोलिक पहचान एहि ठामक विशाल नदियाँ आ पोखरि (तालाब) सँ अछि। ई नदियाँ केवल जलक स्रोत नहि, बल्कि मिथिलाक जीवन, संस्कृति, आ आध्यात्मिकताक आधार थिक। गाम-गाम मे पसरल पोखरि एहि क्षेत्रक जल प्रबंधनक प्राचीन आ वैज्ञानिक कौशल कें दर्शबैत अछि।

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कोसी नदी - मिथिला क जीवन रेखा आ प्राकृतिक सौंदर्य

कोसी (कौशिकी)

कोसी नदी, जकरा प्राचीन ग्रंथ मे 'कौशिकी' कहल गेल अछि, मिथिलाक सभ सँ शक्तिशाली आ चंचल नदी थिक। एकरा 'बिहारक शोक' कहल जाइत अछि कियाक तँ अपन मार्ग बदलबाक प्रबृत्ति आ विनाशकारी बाढ़ि सँ ई क्षेत्र कें कतेको बेर प्रभावित कएलनि अछि। मुदा, मिथिलाक लोक मानस मे ई 'कोसी मैया' क' रूप मे पूजनीय अछि। कोसीक रेनुका (बालू) आ ओकर विशाल विस्तार एकटा अद्वितीय प्राकृतिक सौंदर्य प्रदान करैत अछि। कोसीक कछेर पर बसल सभ्यता अपन संघर्ष आ जीवटता लेल जानल जाइत अछि।

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कमला बलान - मिथिला क पवित्र नदी आ कृषि क आधार

कमला बलान

कमला नदी कें मिथिला मे 'गंगा' क' छोट बहिन मानल जाइत अछि। ई नदी मधुबनी जिलाक जीवन रेखा थिक। कमला क' निर्मल जल सँ मिथिलाक खेत सिंचित होइत अछि, जकर कारणे एकरा समृद्धि आ मंगलकारी शक्ति क' रूप मे पूजल जाइत अछि। प्रतिवर्ष कातिक पूर्णिमा क' दिन कमला क' तट पर लाखों श्रद्धालु जुइत छथि आ 'कमला माई' क' जयघोष करैत पवित्र स्नान करैत छथि। कमला बलानक सभ्यता मिथिलाक कृषि आ लोक परम्परा मे गहीर रचल-बसल अछि।

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बागमती नदी - नेपाल आ मिथिला कें जोड़य वाली पवित्र धारा

बागमती

बागमती नदी मिथिला कें नेपाल आ भारतक बीच एकटा अटूट आध्यात्मिक सूत्र मे जोड़ैत अछि। नेपालक पशुपतिनाथ सँ बहय वली ई नदी मिथिलाक उपजाऊ मैदान मे प्रवेश करैत अछि। बागमती अपन निर्मलता आ पवित्रता लेल विख्यात अछि। एकर कछेर पर कतेको प्राचीन शिवालय आ सिद्धपीठ अवस्थित अछि। बागमतीक बाढ़ि सभ जतेक विनाशकारी होइत अछि, ओतबे ई माटि कें नवीन उर्वरता सेहो प्रदान करैत अछि, जे मिथिलाक मुख्य फसल 'धान' लेल वरदान सावित होइत अछि।

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💧 पोखर (गाम क शान)

मिथिलाक गामक परिभाषा 'माछ, मखान, आ पोखर' क' बिना अधूरा अछि। पोखरि यहाँक सामाजिक जीवनक केंद्र बिंदु होइत अछि। प्रायः हर गाम मे एकटा वा ओहि सँ बेसी विशाल पोखरि होइत अछि, जे न केवल सिचाई आ जल संचयन मे काम अबैत अछि, बल्कि छठि पूजा आ कोजागरा जकाँ महापर्वक आयोजनक मुख्य स्थल सेहो थिक। यहाँक पोखरि मे उपजय वला मखान आ माछ मिथिलाक अर्थव्यवस्थाक आधार थिक। पोखरि क' कात मे बनल ब्रह्मस्थान आ चौपाल गामक लोकक जुड़ाव कें और मजबूत करैत अछि।

मिथिलाक पोखर - ग्रामीण जीवन आ संस्कृति क अभिन्न अंग