प्रदोष व्रत कथा
“प्रदोष व्रत क कथा, जे भगवान शिव आ पार्वती क पूजा लेल कएल जाइत अछि। ई समस्त पाप क नाश करैत अछि आ मनोकामना पूर्ण करैत अछि।”
प्रदोष व्रत कथा (शिव कृपा आ शांडिल्य ऋषिक उपदेश)
१. प्रदोष कालक महिमा
प्रत्येक पक्षक त्रयोदशी तिथिक संध्या काल (सूर्यास्त सँ सवा दू घड़ी धरि) केँ 'प्रदोष काल' कहल जाइत अछि। मान्यता अछि जे प्रदोष काल मे भगवान आशुतोष शंकर कैलाश पर्वतकेँ रजत भवन मे प्रसन्न मुद्रा मे नृत्य करैत छथि आ देवता लोकनि हुनकर स्तुति करैत छथि।
२. विधवा ब्राह्मणी आ विदर्भक राजकुमार
प्राचीन काल मे एकटा अत्यंत धर्मनिष्ठ विधवा ब्राह्मणी अपन बालक शुचिब्रत क संग भिक्षा मांगि कऽ जीवन यापन करैत छलीह। एक दिन भिक्षाटन सँ घुरैत काल हुनका वन मे एकटा घायल आ अनाथ बालक भेटलनि। ओ बालक वास्तव मे विदर्भ देशक राजकुमार धर्मगुप्त छलाह, जिनकर पिताक युद्ध मे मृत्यु भऽ गेल छल आ शत्रु सभ राज्य छीनि लेने छलाह। दयालु ब्राह्मणी राजकुमार केँ अपन घर अनलनि आ अपन पुत्र जकाँ स्नेहपूर्वक पालन-पोषण करय लगलीह।
३. महर्षि शांडिल्यक आश्रम आ प्रदोष व्रत उपदेश
किछु समय बाद ब्राह्मणी दुनू बालक केँ लऽ कऽ देवयोग सँ महर्षि शांडिल्य केँ आश्रम मे गेलीह। ब्राह्मणी ऋषिवर केँ प्रणाम कऽ अपन दरिद्रता आ राजकुमारक राज्य छीना जएबाक दुःख सुनेलनि। महर्षि शांडिल्य दिव्य दृष्टि सँ सभ बात जानि कहलखिन— "हे देवी! भगवान शिवक प्रदोष व्रत समस्त दरिद्रता, शत्रु बाधा आ दुःख केँ भस्म करय वाला अछि। अहाँ आ ई दुनू बालक नियमपूर्वक त्रयोदशीक संध्या काल शिव पूजन करू।"
४. राजकुमार धर्मगुप्त आ गंधर्व कन्या अंशुमती
ब्राह्मणी आ दुनू बालक पूर्ण श्रद्धा सँ प्रदोष व्रत करय लगलाह। चारि मास व्यतीत भेला पर एक दिन ब्राह्मण कुमार आ राजकुमार वन मे समिधा आ फूल चुनय गेलाह। ओतय राजकुमार धर्मगुप्तक भेंट गंधर्वराजक परम सुंदरी कन्या अंशुमती सँ भेलनि। दुनू एक-दोसर केँ देखि मोहित भऽ गेलाह। गंधर्वराज भगवान शिवक आज्ञा पाबि राजकुमार धर्मगुप्त सँ अपन पुत्री अंशुमतीक विवाह संपन्न करौलनि आ विशाल गंधर्व सेना सहायता लेल प्रदान कएलनि।
५. राज्यक पुनर्प्राप्ति आ फलश्रुति
प्रदोष व्रतक प्रताप आ गंधर्व सेनाक सहयोग सँ राजकुमार धर्मगुप्त शत्रु सभ केँ परास्त कऽ अपन पैतृक राज्य विदर्भ पुनः प्राप्त कएलनि। सिंहासन पर बैसलाक बाद ओ अपन धर्ममाता ब्राह्मणी आ ब्राह्मण कुमार शुचिब्रत केँ राजमहल मे सर्वोच्च सम्मान देलनि आ शुचिब्रत केँ अपन प्रधानमंत्री नियुक्त कएलनि। जे भक्त श्रद्धापूर्वक प्रदोष व्रत आ कथा श्रवण करैत अछि, हुनकर घर मे कहियो दरिद्रता वा संकट नहि ठहरैत अछि।
