मिथिलाक मंत्र
वैदिक आ पौराणिक मंत्रक संग्रह
गायत्री महामंत्र
ओहि प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक देवस्वरुप परमात्मा केँ हम हृदयसँ स्मरण करी। वैह परमात्मा हमर बुद्धिके सन्मार्गमे प्रेरित करथि।
यज्ञोपवीत (जनेऊ) धारण मंत्र
यज्ञोपवीत परम पवित्र अछि, जे प्रजापति ब्रह्मा क संग आदिकाल सं अछि। ई आयुवर्धक, श्रेष्ठ आ निर्मल अछि। एकरा धारण केला सं बल आ तेज क प्राप्ति होइत अछि।
पुरान जनेऊ त्याग मंत्र
हे सूत्र! एतेक दिन धरि हम अहाँक धारण कएलहुँ। आब अहाँ पुरान भ' गेल छी, तें हम अहाँक त्याग क' रहल छी। अहाँ सुखपूर्वक जाउ।
रक्षा सूत्र (राखी) मंत्र
जेना दानव राज बलि केँ रक्षासूत्र सं बान्हल गेल छलखिन, तहिना हम अहाँक बान्हैत छी। हे रक्षासूत्र! अहाँ स्थिर रहू, अपन धर्म सं नहि डगू।
कुश उखाड़वाक मंत्र
कुश क अग्रभाग मे शिव, मध्य मे विष्णु आ जड़ि मे ब्रह्मा वास करैत छथि। हे पृथ्वी! हमरा कुश दिअ। देवता आ पितर लोकनिक काज लेल हम कुश उखाड़ि रहल छी।
दूर्वाक्षत मंत्र (वैदिक राष्ट्रीय प्रार्थना)
हे भगवान! अपन देश मे ज्ञानी, शूरवीर, आ गुणी लोक उत्पन्न होथि। समय पर बरखा हो, खेती-बारी नीक हो। हमरा सबहक कल्याण हो। शत्रुक नाश हो आ मित्रक उन्नति हो।
नवग्रह मंत्र
ब्रह्मा, विष्णु, महेश, आ सब नवग्रह (सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु) हमर दिन मंगलमय करथि।
गणेश मंत्र
हे गणेश! अहाँक सूँढ़ टेढ़ अछि, शरीर विशाल अछि आ तेज करोड़ सूर्य क समान अछि। हमर सब काज बिना कोनहु बाधा क संपन्न करू।
शांति मंत्र
ईश्वर हम दुनू (गुरु-शिष्य) क संग-संग रक्षा करथि, हम दुनू संग-संग भोजन (उपभोग) करी, आ संगहि मिलिकय महान कार्य करी। हमर सबहक ज्ञान तेजस्वी हो, आ हमरा सब मे कोनो द्वेष नहि हो। ॐ शांति।
महामृत्युंजय मंत्र
हम तीन आँखि वाला शिवजी क पूजा करैत छी, जे सुगंधित छथि आ सभक पालनहार छथि। जेना पाकल ककड़ी लत्तर सं अपने-आप टुटि जाइत अछि, तहिना हमहू मृत्यु क बंधन सं मुक्त भ' जाइ, मुदा अमरता सं नहि। (अर्थात मोक्ष पाबी)।
छठ पूजा अर्घ्य मंत्र
हे हजार किरण वाला सूर्यदेव! अहाँ तेजक राशि आ ई संसारक स्वामी छी। कृपाकय हमरा भक्त पर दया करू आ हमर अर्घ्य स्वीकार करू।
सिन्दूर दान मंत्र
ई कनिया परम मंगलमय छथि। अहाँ सब आबी आ इनका देखू। इनका सौभाग्यक आशीर्वाद द क अपने-अपने स्थान केरा प्रस्थान करू।
जितिया पावनि मंत्र
जे कर्पूर क समान गोरा छथि, करुणा क सागर छथि, संसार क सार छथि आ साँप क माला पहिरने छथि। ओ भगवान शिव माता पार्वती क संग हमर हृदय मे सदा वास करथि।
सरस्वती वन्दना
जे कुन्द क फूल, चन्द्रमा, आ बर्फ क हार जकां उज्जर छथि, जे उज्जर वस्त्र धारण करैत छथि, जिनक हाथ वीणा स सुशोभित अछि। ब्रह्मा, विष्णु आ महेश द्वारा पूजित, ओ देवी सरस्वती हमर अज्ञान क नाश करथि।