संस्कृति आ परंपरा
एकटा एहन सभ्यता जतय हर अनुष्ठान प्रकृति, संबंध आ भगवान क उत्सव अछि।
मैथिली पहचान
मिथिला क सांस्कृतिक लोकाचार 'संस्कार' (मूल्य) आ आतिथ्य पर केंद्रित अछि। पारंपरिक टोपी, 'पाग', सम्मान आ प्रतिष्ठा क प्रतीक अछि। भाषा, मैथिली, एकटा प्राचीन भाषा अछि जाहि क अपन लिपि (तिरहुता) आ 14म शताब्दी क कवि विद्यापति तक क समृद्ध साहित्यिक इतिहास अछि।
मिथिलाक १६ संस्कार
Explore the sacred journey of life in Mithila from birth to death.
मैथिली शब्दकोष
Learn essential words, phrases, and greetings of Mithila.
सामाजिक संरचना आ रीत-रेवाज
लाल
वर (दूल्हा) आ उपनयन जकाँ शुभ काज मे पहिरल जायत अछि।
पीयर (सरसो)
बरियाती सब पहिरैत छथि। ई खुशी क प्रतीक अछि।
उज्जर / पाग
बुजुर्ग लोकनि आ गंभीर अवसर पर पहिरल जायत अछि। (White represents maturity).
🏡 मैथिल गाम
गामक केंद्र 'ब्रह्मस्थान' (डीहवार बाबा) होइत अछि। 'चौपाल' वा 'बासा' पर गामक लोक सब जुटैत छथि, किस्सा-पिहानी आ पंचायत होइत अछि।
महापर्व
छठि पूजा
मिथिलाक सभसँ पैघ महापर्व, सूर्य आ छठी मैया कें समर्पित। पवित्रता, उपवास आ अर्घ्यक ४ दिवसीय उत्सव।
दुर्गा पूजा
शक्तिक उपासना। मिथिला मे, अनुष्ठान मे तांत्रिक परंपरा आ विशिष्ट माटियक मूर्ति शैली शामिल अछि।
होली (फगुआ)
रंगक पावनि, 'फगुआ' लोकगीत आ तीत-झाल व्यंजनक संग मनाओल जाइत अछि।
दिवाली (दीपावली)
इजोतक पावनि। मिथिला मे, ई अक्सर काली पूजा आ 'हुक्का-पाती' खेल सँ जुड़ल रहैत अछि।
पावन व्रत
जितिया (जीवित्पुत्रिका)
संतानक कल्याण लेल माय लोकनि द्वारा राखल जाय वाला २४ घंटाक कठिन निर्जला उपवास।
चौठ-चन्द्र (चौरचन)
साँझ खन दही आ फलक 'अर्घ्य' क' संग चंद्र देवक पूजा। 'पिरकिया' (गुझिया) विशेष पकवान अछि।
मधुश्रावणी
साओन मे नवविवाहित कनिया लेल १३ दिवसीय पावनि, जतय नाग देवताक पूजा होइत अछि।
वरसाइन (वट सावित्री)
विवाहित महिला अपन पति लेल लंबी उम्रक कामना करैत बरक गाछक चारू कात सुत बान्हैत छथि।
अनंत पूजा
भगवान विष्णु (अनंत) क पूजा। बांहि पर १४ गांठी वाला पवित्र सुत (रक्षा सूत्र) बान्हल जाइत अछि।
नाग पंचमी
साँपक पूजा, दूध आ लावा (खील) चढ़ाओल जाइत अछि।
देवोत्थान एकादशी
भगवान विष्णुक जागए आ विवाहक मौसमक शुरुआतक प्रतीक।
मौसमी आ सांस्कृतिक
जुड़ शीतल (मैथिली नव वर्ष)
मेष संक्रांति पर मनाओल जाइत अछि। बुजुर्ग 'बासी' पानि छीइट क' छोट कें आशीर्वाद दैत छथि। 'बड़ी-भात' खाएब रिवाज अछि।
सामा चकेवा
कातिक मास मे भाई-बहिनक स्नेहक उत्सव। अहि मे लोकगीत आ चिरई-चुनमुनीक माटियक मूर्ति शामिल अछि।
कोजागरा
आश्विन पूर्णिमा। देवी लक्ष्मी आ खंडवाला (कुल) कें समर्पित, नवविवाहित जोड़ीक लेल विशेष उत्सव।
विवाह पंचमी
राम आ सीताक विवाहक सालगिरह। जनकपुर आ सीतामढ़ी मे भव्य समारोह आयोजित कैल जाइत अछि।
तिला संक्रांति
मकर संक्रांति। 'तिलवा' (तिल क' लड्डू) आ 'चूड़ा-दही' खाएब रिवाज अछि।
सरस्वती पूजा
बसंत पंचमी। विद्याक देवीक पूजा, वसंतक आगमनक प्रतीक।
जानकी नवमी
माता सीता (जानकी) क जन्मोत्सव। सीतामढ़ी आ जनकपुर मे धूमधाम सँ मनाओल जाइत अछि।
कृष्णाष्टमी (जन्माष्टमी)
भगवान कृष्ण क जन्मोत्सव। मिथिला मे 'रोहिणी' नक्षत्र कें विशेष महत्व देल जाइत अछि।
साहित्य आ दर्शन
वैदिक युग सँ ही मिथिला ज्ञान क केंद्र रहल अछि। ई न्याय शास्त्र (तर्क) क जन्मस्थली अछि। 12म शताब्दी मे गंगेश उपाध्याय द्वारा स्थापित 'नव्य-न्याय' (नव तर्कशास्त्र) विद्यालय भारतीय दर्शन मे क्रांति ला दी। एहि क्षेत्र विद्यापति सन साहित्यिक दिग्गज कें जन्म देलक, जिनकर मैथिली गीत सब भक्ति आंदोलन कें प्रभावित कएलक। 'वर्णरत्नाकर' (14म शताब्दी) कोनो उत्तर भारतीय भाषा में सबसँ पुरान ज्ञात गद्य रचना अछि।
डाक वचन (लोकोक्ति)
"आद्रा गेला, तीनू गेला: सन, साठि, कपास।"
जँ आद्रा नक्षत्र बिनु बरखा क बीति जाय, त तीन फसल नाश भ जायत छैक: सन (जूट), साठि धान आ कपास।
"खेत खाय गदहा, मार खाय जोल्हा।"
दोष केकरो, आ सजा केकरो और। (फसल गदहा खलक आ मारल गेल जोल्हा)।
"आपन मौध, जगत मौध।"
जँ अहाँ निक छी, त दुनिया अहाँक लेल निक अछि।
आधुनिक साहित्यकार
नागार्जुन (यात्री जी)
जनकवि। अपन धारदार राजनीतिक व्यंग्य आ 'पत्रहीन नग्न गाछ' लेल प्रसिद्ध। साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता।
राजकमल चौधरी
मैथिली साहित्य क प्रयोगवादी आ विद्रोही स्वर। हिनक कथा आ उपन्यास लीक सँ हटि क अछि।
ललित
'पृथ्वीपुत्र' सन कथा लेल प्रसिद्ध, जे शोषित वर्ग क आवाज बनलाह।
मिथिलाक सिनेमा
मैथिली फिल्म उद्योग १९६५ मे विनम्र शुरुआत सँ राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता सिनेमा क निर्माण धरि बढ़ल अछि। ई लचीलापन आ सांस्कृतिक कथावाचन क यात्रा अछि।
शुरुआत (१९६० के दशक)
यात्रा 'कन्यादान' (१९६५) क संग शुरू भेल, जाहि क निर्देशन फणी मजूमदार कएने छलाह। हरि मोहन झा क उपन्यास पर आधारित, ई एकटा एहन व्यक्ति क कहानी छल जे अपन पत्नी क दुनिया कें जोड़बा लेल ओकर भाषा सिखैत अछि। ई सामाजिक रूप सँ प्रासंगिक सिनेमा लेल टोन सेट कएलक।
स्वर्ण ८० क दशक आ पुनरुद्धार
'ममता गावे गीत' (१९८४) अपन मधुर गीत क संग घर-घर मे प्रसिद्ध भ गेल। ९० क दशक क उत्तरार्ध मे मुरली धर द्वारा 'सस्ता जिनगी महग सिनुर' (१९९९) क संग एकटा व्यावसायिक पुनरुद्धार देखल गेल, जे साबित क देलक जे मैथिली सिनेमा क पास व्यावसायिक रूप सँ व्यवहार्य दर्शक छल।
आधुनिक पुनर्जागरण
उद्योग वर्तमान मे समीक्षक सब द्वारा प्रशंसित स्वर्ण युग मे अछि। नितिन चंद्रा द्वारा 'मिथिला मखान' (२०१६) मैथिली फिल्म लेल अब तक क पहिल राष्ट्रीय पुरस्कार जितलक। 'गामक घर' (२०१९) जकाँ हालिया उत्कृष्ट कृति कें ग्रामीण जीवन क हुनक कलात्मक चित्रण लेल अंतरराष्ट्रीय समारोह (MAMI) मे सराहना कएल गेल अछि, जे वैश्विक कला-गृह सिनेमा मे मिथिला क प्रवेश कें चिह्नित करैत अछि।
Notable Films
संगीत आ नृत्य
मिथिला मे जन्म सँ ल क मृत्यु धरि हर जीवन चक्र क घटना लेल एकटा गीत अछि। शास्त्रीय संगीत परंपरा राजा नान्यदेव (११म शताब्दी) क समय सँ चलि आबि रहल अछि, जे राग सब कें व्यवस्थित कएलनि। आइ, ई विरासत लोक आ शास्त्रीय दुनू रूप मे जीवित अछि।
नचारी
भगवान शिव कें समर्पित भक्ति गीत। विद्यापति क नचारी एतेक शक्तिशाली अछि जे कहल जाइत अछि जे ओ शिव कें हुनक सेवा करबा लेल मजबूर क देलनि।
लगनी
प्रेम आ मिलन क गीत, आमतौर पर मसाला वा अनाज कें धीरे-धीरे पिसबाक दौरान गाओल जाइत अछि, जे दैनिक जीवन क लय सँ मेल खाइत अछि।
समदौन
विदाई क दिल दहला देबा वाला गीत, जखन कनिया अपन घर छोड़ैत छथि। कोनो वाद्ययंत्र उपयोग नहि कएल जाइत अछि, जे कच्ची भावना पर जोर दैत अछि।
सोहर
बच्चा क जन्म पर गाओल जाय वाला उत्सवी गीत, जे अक्सर भगवान राम वा कृष्ण क जन्म कथा कें फेर सँ सुनबैत अछि।
मिथिलाक धुन
लोक नृत्य आ नाच
झिझिया
इन्द्र देवता कें प्रसन्न करबाक लेल महिला सबहक नृत्य। माथ पर ठील्हा, ओहि में दीप, आ ढोलक क ताल। ई दृश्य अद्भूत होइत अछि।
जट-जटिन
साओन-भादव क इजोरिया राति मे होय वाला लोक-नाट्य। जट आ जटिन क नोक-झोंक क माध्यम सँ समाज क कुरीति पर प्रहार कएल जाइत अछि।
विद्यापति संगीत
महाकवि विद्यापति क रचना। नचारी (बाबा क भक्ति) आ महेशबानी आई सेहो मिथिलाक कण-कण मे बसाब अछि। हर घर मे ई गीत गाओल जाइत अछि।
लोकगाथा, नायक आ कुलदेवता
मिथिलाक लोक परंपरा मे वीरता, बुद्धि, आ भक्ति क अनेको कथा प्रचलित अछि जे समाज कें दिशा दैत अछि।
गोनू झा
'मिथिलाक बीरबल'। १३हम शताब्दीक एक विद्वान आ विदूषक, जे अपन बुद्धि आ हास्य सं जतिल समस्याक समाधान करैत छलाह।
राजा सलहेश
दुसाध समुदायक राजा, जिनका देवताक रूप मे पूजा कयल जायत अछि। ओ सामंती शोषणक विरुद्ध वीरता आ सामाजिक न्याय केर प्रतीक छथि।
दीना भद्री
दुई भाइ, जिनका मुसहर समुदाय द्वारा पूजल जायत अछि। ओ अत्याचारक विरुद्ध लड़लाह आ अपन अपार शक्ति आ संरक्षणक लेल जानल जायत छथि।
रेशमा चूहड़मल
एक अमर प्रेम कथा जे जातिगत सीमा तोड़ैत अछि। चूहड़मल के ओकर विद्रोहक लेल लोक नायक मानल जायत अछि।
राजा बलि
असुर होअय के बादो, राजा बलि मिथिला मे अपन दानवीरताक लेल पूजनीय छथि। 'दानवीर बलि' कहावत वामन अवतारक कथा सं जुड़ल अछि।
मैथिल विवाह संस्कार
मिथिला क शादी क परंपरा सब विश्व स्तर पर सब सँ अनूठ अछि। 4 दिन क समारोह वैदिक अनुष्ठान आ लोक रीति-रिवाज सँ भरल रहैत अछि।
सौराठ सभा
मधुबनी मे आयोजित एकटा प्राचीन विवाह सम्मेलन जतय परिवार सब वंशावली (पंजी प्रबंध) क मिलान करैत छथि ताकि अनुकूलता सुनिश्चित होय आ समान गोत्र विवाह सँ बचल जा सकय।
कोहबर कला
दुल्हिन क कक्ष कें जटिल कोहबर चित्र सँ सजाओल जायत छै जे उर्वरता, समृद्धि आ दिव्य आशीर्वाद क प्रतीक दर्शबैत छै। ई कला रूप मिथिला विवाह लेल विशिष्ट अछि।
समधान
औपचारिक समझौता समारोह जतय दुनू परिवार पान आ मिठाई क आदान-प्रदान करैत छथि, गठबंधन कें सील करैत छथि।
कन्यादान आ सप्तपदी
दुल्हिन क पिता कन्यादान करैत छथि, एकर बाद दंपति अग्नि क चारू कात सात पवित्र कदम उठबैत छथि, प्रत्येक कदम एकटा प्रतिज्ञा क प्रतिनिधित्व करैत छै।
तिरहुता लिपि: खोयल वर्णमाला
मैथिली पारंपरिक रूप सँ तिरहुता (मिथिलाक्षर सेहो कहल जायत छै) लिपि मे लिखल जायत छल, जे 14वीं शताब्दी क एकटा प्राचीन ब्राह्मी लिपि छै।
History
तिरहुता 20वीं सदी धरि मैथिली साहित्य क प्राथमिक लिपि छल। विद्यापति क रचना सब मूल रूप सँ एहि लिपि मे लिखल गेल छल। देवनागरी कें अपनाबय क संग, तिरहुता क उपयोग कम भ गेल।
Revival
यूनिकोड समर्थन आ शैक्षिक पहल सब क माध्यम सँ तिरहुता कें पुनर्जीवित करय क प्रयास चलि रहल अछि। ई लिपि मिथिला क विशिष्ट भाषाई पहचान क प्रतीक बनल अछि।
आइ, अधिकांश मैथिली देवनागरी मे लिखल जायत छै, मुदा तिरहुता अखनो औपचारिक रूप सँ आ पारंपरिक पांडुलिपि सब मे उपयोग कयल जायत छै। ऐतिहासिक रूप सँ, 'कैथी' लिपि क उपयोग सेहो आधिकारिक रिकॉर्ड लेल कएल जाइत छल।