लोककथा आ ज्ञान

मिथिला क मौखिक परंपरा सब बुद्धि, विनोद आ प्राचीन ज्ञान क गप्प सब सँ जीवित अछि।

झिझिया: विश्वास आ संरक्षणक नृत्य
Dance

झिझिया: विश्वास आ संरक्षणक नृत्य

झिझिया मिथिला क्षेत्रक एकटा अनुष्ठानिक लोक नृत्य अछि, जे नवरात्रि केँ समय कएल जाइत अछि। ई भगवती दुर्गाक प्रति भक्ति आ गाम-घर केँ कुदृष्टि सँ बचेबाक एकटा माध्यम अछि।

विधि आ महत्व

मानल जाइत अछि जे ई नृत्य डाइन-जोगिनक नजरि सँ गाम केँ रक्षा करैत अछि।

डोमकच: मिथिलाक महिला सभक निजी रंगमंच
Theatre

डोमकच: मिथिलाक महिला सभक निजी रंगमंच

डोमकच शादिक समय मे कएल जाइ वाला एकटा हास्य-विनोद सँ भरल लोक नृत्य आ नाटक अछि। ई विशेष रूप सँ महिला सभ द्वारा कएल जाइत अछि।

विधि आ महत्व

डोमकच महिला सभक अभिव्यक्ति आ आपस मे जुड़बाक एकटा सशक्त माध्यम अछि।

जट-जटिन: शाश्वत प्रेम क' गाथा
Dance

जट-जटिन: शाश्वत प्रेम क' गाथा

जट-जटिन मिथिलाक एकटा बड्ड लोकप्रिय लोक नृत्य अछि, जे वर्षा ऋतु मे कएल जाइत अछि। ई पति (जट) आ पत्नी (जटिन) क' बीचक प्रेम आ मधुर नोकझोंक केँ देखबैत अछि।

विधि आ महत्व

ई नृत्य अक्सर सुखार मे बरखाक लेल प्रार्थना आ वैवाहिक सुख-शांतिक प्रतीक मानल जाइत अछि।

सामा चकेवा: भाय-बहिनक प्रेम क' उत्सव
Festival

सामा चकेवा: भाय-बहिनक प्रेम क' उत्सव

सामा चकेवा कार्तिक मास मे मनाओल जाइ वाला मिथिलाक एकटा विशिष्ट पाबनि अछि, जे भाय-बहिनक पवित्र संबंध पर आधारित अछि।

विधि आ महत्व

ई पाबनि भाय क' दीर्घायु आ सुख-समृद्धिक लेल मनाओल जाइत अछि।

लोक नायक विशेष

गोनू झा: मिथिला क परिहास-मर्मज्ञ

“गोनू झा अपन तीक्ष्ण बुद्धि आ विनोद लेल प्रसिद्ध छलाह। अक्सर बीरबल वा तेनाली राम सँ तुलना कयल जायत छन्हि, हुनक खिस्सा सब केवल हँसये नहि छै, बल्कि गहीर सामाजिक ज्ञान सेहो दै छै।”

गोनू झाक किस्सा पढू →
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मिथिलाक लोक गीत

हर संस्कार और हर मौसम लेल गीत।

गीत आ भावार्थ देखू

पावनि कथा (Legends)

उगना महादेव (विद्यापति जी)

किस्सा ई अछि जे विद्यापति बाबाजी क भक्ति देखिकय महादेव स्वयं 'उगना' बनि क हुनक चाकरी केलनि। मुदा जहिया भेद खुलल, उगना ओतहि अंतर्ध्यान भ गेलाह। भवानीपुर क मंदिर एहि बातक गवाह अछि।

अहिल्या उद्धार

गौतम ऋषि के श्राप सं पाथर बनल अहिल्या, अहिल्या स्थान (दरभंगा) में राम जी क बाट जोहि रहल छली। प्रभु राम क चरण पड़ला सं हुनक उद्धार भेल।

प्रसिद्ध लोक कथा सभ

बिलेर आ दूध

एक बेर गोनू झा सँ सिद्ध करय लेल कहल गेलनि जे सब बिलेर दूध पसंद नहि करैत अछि। ओ एकटा बिलेर कें खौलैत दूध द देलखिन। बिलेर क जीभ जरि गेल आ ओ फेर कहियो दूध नहि छुयलक। जखन राजा देखलनि, त गोनू झा कहलनि, 'देखू, आदत सिखल जायत छै, जन्मजात नहि होइ छै।'

चोर आ पोखरि

गोनू झा क घर मे चोर घुसि आयल। ई जनितहुँ, ओ जोर सँ अपन कनिया कें कहलनि, 'हम सब सोना पोखरि मे नुका देलियै हय।' चोर सब रति भरि पोखरि उलीचैत रहल। भोर धरि ओ सब थाकि गेल छल आ पकड़ा गेल, जखन कि गोनू झा निचिंत सुतल रहलाह।