पाछाँ (व्रत कथा)
जितिया व्रत कथा
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जितिया व्रत कथा (चील्ह आ सियारिन):चील्ह आ सियारिन प्रसंग:नर्मदा नदीक तट पर कंचनवटी नगर मे एकटा पाकरिक गाछ पर चील्ह आ ओही गाछक नीचाँ खोह मे सियारिन रहैत छलीह। दुनू घनिष्ठ सखी छलीह। एक बेर दुनू गोटे जितिया व्रत (जीमूतवाहन व्रत) करबाक संकल्प कएलनि। मुदा, राति मे घनघोर वर्षा आ तूफान आयल। भूख सँ व्याकुल भऽ सियारिन मशान घाट जा कऽ मुर्दाक मांस खा लेलनि आ अपन व्रत तोड़ि देलनि। मुदा चील्ह पूरी निष्ठा आ संयम सँ निर्जला व्रत पूर्ण कएलनि।पुनर्जन्म:अगिला जन्म मे दुनू गोटे एकहि परिवार मे जन्म लेलनि। चील्ह बनलीह 'शीलवती' (ब्राह्मण कन्या) आ सियारिन बनलीह 'कर्पूरावती' (राजाक रानी)। शीलवतीक सात पुत्र भेलाह आ सब दीर्घायु भेलाह। कर्पूरावतीक बेटा जन्म लैते मरि जाइत छलाह।ईर्ष्यावश कर्पूरावती शीलवतीक पुत्र सभ केँ मारबाक प्रयास कएलनि। ओ सातो पुत्रक मुंडी कटवा कऽ लाल कपड़ा मे झांपि कऽ शीलवती केँ पठओलनि। मुदा भगवान जीमूतवाहनक कृपा सँ ओ मुंडी पुनः जुड़ि गेल आ पुत्र जीवित भऽ गेलाह। जब कर्पूरावती ई चमत्कार देखलनि, तँ शीलवती हुन्का पूर्वजन्मक बात बतेलखिन जे 'अहाँ व्रत खंडित केने रही, तहि लेल अहाँक संतान नहि बचैत अछि।' कर्पूरावती पश्चाताप कएलनि आ क्षमा मांगलीह।जीमूतवाहन कथा:गन्धर्व राजकुमार जीमूतवाहन अत्यंत उदार आ परोपकारी छलाह। एक दिन ओ देखलनि जे नाग माता 'शंखचूड़' (नाग) क बलिक लेल विलाप कऽ रहल छथि। गरुड़ केँ प्रतिदिन एक नागक बलि देल जाइत छल। जीमूतवाहन शंखचूड़क जगह स्वयं लाल कपड़ा ओढ़ि कऽ बलि वेदी पर लेट गेलाह। गरुड़ जखन मांस खाए लेल एलाह तँ जीमूतवाहनक त्याग देखि प्रसन्न भेलाह आ अहिंसाक वचन देलनि।एहि व्रत क प्रभाव सँ संतानक अकाल मृत्यु नहि होइत अछि आ ओ दीर्घायु होइत छथि।
भावार्थ
जीमूतवाहन क कथा, जे संतान क कल्याण आ दीर्घायु लेल मनाओल जाइत अछि।