पाछाँ (व्रत कथा)

अनंत चतुर्दशी व्रत कथा

storyvrat
अनंत चतुर्दशी व्रत कथा (कौंडिन्य ऋषि आ अनंत सूत्र):पांडव आ श्रीकृष्ण:महाभारत काल मे, जुआ मे अपना राज्य हारला क बाद पांडव वनवास भोगि रहल छलाह। युधिष्ठिर अपन कष्टक निवारण लेल श्री कृष्ण सँ उपाय पुछलनि। कृष्ण हुन्का 'अनंत चतुर्दशी' क व्रत करबाक सलाह देलखिन आ ई कथा सुनेलखिन।सुशीला आ कौंडिन्य ऋषि:सुमंत नामक ऋषि आ हुन्कर पुत्री सुशीला क विवाह कौंडिन्य ऋषि सँ भेलनि। विदागरी क समय सुशीला देखलनि जे किछु स्त्री लोकनि अनंत भगवानक पूजा कऽ रहल छथि। ओहो ओतय जा कऽ 14 गेंट वाला 'अनंत सूत्र' (डोरा) बन्हलनि। एहि डोराक प्रभाव सँ कौंडिन्य ऋषिक आश्रम धन-धान्य सँ भरि गेल।अनंत सूत्रक अपमान आ पश्चाताप:एक दिन कौंडिन्य ऋषि अहंकारवश सुशीला क हाथ मे बन्हल डोरा केँ 'जादू-टोना' कहि कऽ तोड़ि आगु मे फेक देलनि। एहि सँ भगवान अनंत क्रोधित भेलाह आ ऋषि पुनः दरिद्र भऽ गेलाह। अपनी गलतीक अहसास भेला पर ऋषि वन-वन 'अनंत! अनंत!' कहैत भटकलाह। अंत मे भगवान अनंत प्रसन्न भऽ हुन्का दर्शन देलखिन आ 14 वर्ष धरि व्रत करबाक आदेश देलखिन।अनंतक 14 गेंट 14 लोक (तल, अतल, वितल...) क प्रतीक अछि।
भावार्थ

ऋषि कौंडिन्य आ अनंत सूत्र-डोराक कथा। 14 गेंट 14 लोक क प्रतीक अछि। ई व्रत अपन कष्टक निवारण आ सुख-समृद्धि लेल कएल जाइत अछि।