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Upanayan (Sacred Thread)

बरुआ रे तोरा सासुर

मैथिली लोक संगीत एवं स्वर पाठ

तानपूरा की शास्त्रीय संगति के साथ पारंपरिक मैथिली गीत का आनंद लें अथवा स्वयं गायन करें।

वर्तमान गायन / वाचन पंक्ति (1 / 15)

“बरुआ रे तोरा सासुर बड दूर”

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मैथिली बोल

बरुआ रे तोरा सासुर बड दूर जहि रे नगरिया बरुआ जायब, सेहो नगर बड दूर बरुआ रे... बाटहि में भेटल एक जोलहा, जोलहा रे हमरो बरुआ के सुतवा दिह हे, जोलहा बरुआ रे... बाटहि में भेटल एक धोबिया, धोबिया रे हमरो बरुआ के धोती दिह हे, धोबिया बरुआ रे... बाटहि में भेटल एक सोनरा, सोनरा रे हमरो बरुआ के जनउआ दिह हे, सोनरा बरुआ रे... बाटहि में भेटल एक मालिन, मालिन रे हमरो बरुआ के फुलवा दिह हे, मालिन बरुआ रे...

भावार्थ एवं संदर्भ

उपनयन (जनेऊ) संस्कार के अवसर पर गाया जाने वाला पारंपरिक गीत, जिसमें बरुआ (बटु) को जुलाहा, धोबी, सोनार और मालिन से यज्ञोपवीत व वस्त्र मांगने का मधुर वर्णन है।

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