पाछाँ

दूर्वाक्षत मंत्र (वैदिक राष्ट्रीय प्रार्थना)

blessingritual
ॐ आब्रह्मन ब्राह्मणों ब्रह्मवर्चसी जायतामाराष्ट्रे राजन्यः शूर इषव्यौऽतिव्याधि महारथी जायताम...(पूर्ण: मंत्रार्था: सिद्धयः सन्तु पूर्णाः सन्तु मनोरथाः। शत्रुणां बुद्धिनाशोऽस्तु मित्राणामुदस्तव।)
भावार्थ

हे भगवान! अपन देश मे ज्ञानी, शूरवीर, आ गुणी लोक उत्पन्न होथि। समय पर बरखा हो, खेती-बारी नीक हो। हमरा सबहक कल्याण हो। शत्रुक नाश हो आ मित्रक उन्नति हो।