पाछाँ

कुश उखाड़वाक मंत्र

ritualamavasya
कुशाग्रे वसते रूद्रः कुशमध्ये तु केशवः ।कुशमूले वसेद्‌ ब्रह्मा कुशान्मे देहि मेदिनी ॥कुशोऽसि कुशपुत्रोऽसि ब्रह्मणा निर्मिता पुरा ।देवपितृ हितार्थाय कुशमुत्पाट्याम्यहम्‌ ॥
भावार्थ

कुश क अग्रभाग मे शिव, मध्य मे विष्णु आ जड़ि मे ब्रह्मा वास करैत छथि। हे पृथ्वी! हमरा कुश दिअ। देवता आ पितर लोकनिक काज लेल हम कुश उखाड़ि रहल छी।