← कैलेंडर पर वापस जाएं

हरितालिका तीज व्रत

हरितालिका तीज व्रत

क्यों मनाया जाता है

माता पार्वती की कठोर तपस्या और भगवान शिव से मिलन के स्मरण में अखंड सौभाग्य हेतु मनाया जाता है।

इतिहास और कथा

सखियों द्वारा पार्वती जी को वन में हर ले जाने (हरित + आलिका) और वहां रेत के शिवलिंग की तपस्या करने से इस व्रत का नाम हरितालिका तीज पड़ा।

कब मनाया जाता है

भाद्रपद शुक्ल तृतीया (१४ सितंबर २०२६), चौरचन पर्व से एक दिन पूर्व।

कैसे मनाया जाता है

निर्जला उपवास, पार्थिव शिव-पार्वती की स्थापना, सुहाग पिटारी व पिरुकिया अर्पण, रात्रि जागरण और हरितालिका व्रत कथा का श्रवण।

त्योहार के बारे में

मिथिला में तीज और चौरचन लगातार दो दिनों तक मनाए जाने वाले अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व हैं। घर-घर में खोया व सूजी की पिरुकिया बनती है और महिलाएं सामूहिक रूप से शिव-गौरी की आराधना एवं महेशवाणी-नचारी का गायन करती हैं।