मंदार हिल
📍 बांका (प्राचीन मिथिला सीमा)

बिहारक बांका जिला में अवस्थित मंदार हिल, भारतीय पौराणिक कथा, इतिहास आ भूवैज्ञानिक आश्चर्यक एकटा मेल अछि। प्राचीन ग्रंथ सभ में 'मंदराचल पर्वत' क' रूप में प्रसिद्ध, ई लगभग ७०० फीट ऊँच ग्रेनाइट पर्वत 'समुद्र मंथन' क' दौरान प्रयोग कएल गेल मथानी क' रूप में चिन्हल जाइत अछि। पुराण आ महाभारतक अनुसार, देवता आ असुर सभ अमरताक अमृत निकालय लेल एही पर्वत क' उपयोग कएने छलाह, जतय नागराज वासुकी रस्सीक काज कएने छलाह। पर्वत क' सतह पर बनल घुमावदार निशान केँ श्रद्धालु आइयो ओहि महान सर्पक शरीरक शाश्वत चिन्ह मानैत छथि। ई पर्वत हिंदू आ जैन दुनू लेल गहीर पवित्र अछि। हिंदुक लेल, ई ओही स्थान अछि जतय भगवान विष्णु मधु आ कैटभ नामक असुरक वध कएने छलाह, जकर कारणे हुनका 'मधुसूदन' कहल जाइत अछि। पर्वत पर गुप्त कालक विष्णु क' 'नरहरि' (मानव-सिंह) अवतारक एकटा अद्वितीय पत्थरक मूर्ति अछि। ७वीं शताब्दीक शिलालेख राजा आदित्यसेन आ हुनकर रानी श्री कोंडा देवीक राजकीय संरक्षण केँ दर्ज करैत अछि, जे पर्वत क' जड़ में 'पाप हारिणी' पोखरि क' निर्माण कएने छलाह—जतय तीर्थयात्री ऊपर जाय सँ पहिने अपन पाप धोबय लेल स्नान करैत छथि। जैन समुदायक लेल, मंदार हिल १२म तीर्थंकर भगवान वासुपूज्यक 'निर्वाण स्थल' थीक, आ शिखर पर हुनकर स्मृति में कतेको सुंदर मंदिर बनल अछि।
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