कला आ ज्ञान क गाम

मंग्रौनी

📍 मधुबनी

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तंत्र आ ज्योतिष सं जुड़ल एक प्राचीन गाम। एतय ११ एकादश रुद्र मंदिर स्थापित अछि, जे अदभुत अछि।

योगदानकर्ता

✍️Anish Jha
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जनकपुरधाम
कला आ ज्ञान क गाम
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जनकपुरधाम

जनकपुरधाम, विदेह साम्राज्यक प्राचीन राजधानी आ मिथिलाक आध्यात्मिक मुकुटमणि थिक। ई पावन नगरी माता जानकी (सीता) क जन्मभूमि आ राजा जनकक तपोभूमि क रूप मे विश्वविख्यात अछि। एहि नगरीक केंद्र मे भव्य 'जानकी मंदिर' अवस्थित अछि, जे अपन अद्भुत वास्तुकला आ मुगल-राजपूत शैलीक सम्मिश्रण लेल जानल जाइत अछि। १८९४ मे टीकमगढ़क महारानी वृषभानु कुमारी द्वारा बनाओल गेल ई मंदिर 'नौखंडा' महल क रूप मे सेहो प्रसिद्ध अछि। जानकी मंदिरक बगल मे 'विवाह मंडप' अछि, जतय मानल जाइत अछि जे भगवान राम आ माता सीताक विवाह भेल छल। जनकपुरधाम के 'पोखरि आ कुण्डक शहर' सेहो कहल जाइत अछि; गंगासागर, धनुषसागर आ परशुराम कुण्ड जकाँ अनगिनत जल स्रोत एहि नगरीक पवित्रता कें बढ़बैत अछि। प्रतिवर्ष विवाह पंचमी क' अवसर पर एहि ठाम लाखों श्रद्धालु जुटैत छथि, जखन पूरा शहर एकटा उत्सवमय दुलहिन जकाँ सजल रहैत अछि। ई शहर केवल तीर्थ नहि, बल्कि मैथिली भाषा, कला आ संस्कृतिक एकटा जीवंत केंद्र अछि, जतय रामायणक कथा कण-कण मे रचल-बसल अछि।

📍 नेपाल

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सीतामढ़ी
कला आ ज्ञान क गाम
3 min

सीतामढ़ी

सीतामढ़ी, जकरा 'सीता मैया क' नहिहर' मानल जाइत अछि, मिथिलाक सभ सँ पावन स्थल सभ मे सँ एक अछि। ई ओही प्राचीन भूमि अछि जतय राजा जनक हल जोति रहल छलाह आ हुनक हलक अग्रभाग (सीत) साएला पर माटि सँ एकटा पात्र मे माता सीता सद्यरूपा प्रकट भेल छलीह। सीतामढ़ी शहर क लग मे अवस्थित 'पुनौरा धाम' ओही ऐतिहासिक आ पौराणिक घटनाक गवाह अछि, जतय जनक जी द्वारा निर्मित एकटा विशाल पोखरि आ जानकी मंदिर अछि। सीतामढ़ीक धूड़ सँ ल' क' एतय बहय वली लखनदेई नदी तक, सब किछु रामायणक पवित्र स्मृति सँ जुड़ल अछि। मुख्य सीतामढ़ी मंदिर मे माता सीता, भगवान राम आ लक्ष्मणक सुंदर प्रतिमा अछि। एतय 'हलेश्वर स्थान' आ 'पंथपाकर' सन अन्य पौराणिक स्थल सेहो अछि, जतय सीता माताक जीवन सँ जुड़ल विभिन्न प्रसंग घटित भेल छल। प्रतिवर्ष रामनवमी आ जानकी नवमी क' अवसर पर एहि ठाम भव्य मेला लागैत अछि, जतय भक्तगण मिथिलाक बेटी सीताक प्रति अपन श्रद्धा व्यक्त करय अबैत छथि। ई स्थान करुणा, त्याग आ पवित्रताक प्रतीक अछि, जे सदियों सँ समस्त नारी जाति लेल प्रेरणाक स्रोत रहल अछि।

📍 बिहार, भारत

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मधुबनी
कला आ ज्ञान क गाम
3 min

मधुबनी

मधुबनी, जकर शाब्दिक अर्थ 'मधु क' वन' (जंगल) होइत अछि, मिथिलाक कला आ संस्कृतिक वास्तविक धड़कन अछि। ई जिला विश्व पटल पर अपन अद्वितीय 'मधुबनी पेंटिंग' वा 'मिथिला चित्रकला' लेल जानल जाइत अछि। जितवारपुर आ रांटी सन प्रसिद्ध गाम एहि कलाक विश्व प्रसिद्ध केंद्र छथि, जतय महिला लोकनि पीढ़ी दर पीढ़ी देबाल सँ ल' क' कागज आ कपड़ा पर रामायण, प्रकृति आ जीवनक सुंदर चित्र उकेरैत अछि। मधुबनी केवल पेंटिंग लेल नहि, बल्कि अपन पांडित्य आ विद्वत्ता लेल सेहो प्रसिद्ध अछि। ई ओही क्षेत्र अछि जतय 'भामती' कृतिक रचयिता वाचस्पति मिश्र जकाँ महान दार्शनिक जनमलाह। मधुबनीक मखाना आ आम अपन मिठास लेल देश-विदेश मे जानल जाइत अछि। एहि ठामक 'कौशिकी' (कोसी) आ 'कमला' नदीक प्रवाह एहि माटि कें उर्वरता प्रदान करैत अछि। एहि जिला मे सौराठ जकाँ ऐतिहासिक स्थल अछि जतय पंजी व्यवस्थाक माध्यम सँ विवाहक निर्णय होइत अछि। मधुबनीक हर कोना मे मैथिली संस्कृतिक शुद्ध रूप देखल जा सकैत अछि, जे अपन परंपरा आ आधुनिकताक बीच एकटा सुंदर सामंजस्य बनाए रखलनि अछि।

📍 बिहार, भारत

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दरभंगा
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दरभंगा

दरभंगा, जकरा 'मिथिलाक हृदयस्थली' आ 'सांस्कृतिक राजधानी' कहल जाइत अछि, अपन भव्य राज-विरासत आ संगीतक समृद्ध परंपरा लेल विश्वविख्यात अछि। ई प्रसिद्ध 'राज दरभंगा' क मुख्य केंद्र रहल अछि, जकर वास्तुकला आ शिक्षण संस्थान आजुओ एकर गौरवशाली अतीत क गाथा कहैत अछि। दरभंगा किला क विशाल ५० फीट ऊँच देबाल, नरगौना पैलेस आ आनंद बाग पैलेस मिथिलाक स्थापत्य कलाक उत्कृष्ट उदाहरण थिक। दरभंगा अपन 'ध्रुपद' गायन आ शास्त्रीय संगीतक विशिष्ट 'मल्लिक' परंपरा लेल सेहो जानल जाइत अछि। एहि ठामक श्यामा माई मंदिर, जे महाराजा रामेश्वर सिंहक चिता पर बनल अछि, एकटा अद्वितीय तांत्रिक शक्तिपीठ थीक। दरभंगा मखाना, माछ आ आमक सभ सँ पैघ व्यापारिक केंद्र अछि। एहि ठामक ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय आ कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय शिक्षाक महान केंद्र छथि। दरभंगा केवल एकटा शहर नहि, बल्कि एकटा एहन अनुभव अछि जतय राजशाही वैभव, आध्यात्मिक गहराई आ मैथिली लोक-जीवनक सुंदर सम्मिश्रण भेटैत अछि। ई शहर अपन पावनि-तिहार आ आतिथ्य सत्कार लेल सेहो प्रसिद्ध अछि।

📍 बिहार, भारत

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अहिल्या स्थान
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अहिल्या स्थान

दरभंगा जिलाक जाले प्रखंड मे अवस्थित अहिल्या स्थान, रामायण कालक एकटा अत्यंत महत्वपूर्ण आ भावुक प्रसंगक गवाह थिक। पौराणिक कथाक अनुसार, ई ओही ऋषि गौतमक आश्रम थिक जतय माता अहिल्या अपन पति द्वारा देल गेल श्राप सँ पाषाण (पत्थर) बनि गेलीह। सदियों धरि पत्थरक रूप मे प्रतीक्षा भेलाक बाद, जखन त्रेता युग मे भगवान राम अपन गुरु विश्वामित्र आ भाइ लक्ष्मणक संग एहि ठाम अएलाह, तँ हुनक चरण स्पर्श (चरणामृत) सँ माता अहिल्याक उद्धार भेल आ ओ पुनः अपन मानवी स्वरूप प्राप्त कएलनि। एहि मंदिर मे कोनो मूर्ति नहि, बल्कि एकटा पत्थरक चरण-चिन्ह अछि जकरा भक्तगण परम श्रद्धा सँ पूजैत छथि। अहिल्या स्थानक महत्व अहि लेल सेहो अछि जे ई नारीक धैर्य आ भगवानक अहेतुकी कृपाक प्रतीक अछि। प्रतिवर्ष रामनवमी क' दिन एहि ठाम भारी उत्सव होइत अछि। मंदिरक आसपासक शांत वातावरण आ लग मे बहय वली नदी एकटा दिव्य आध्यात्मिक ऊर्जाक संचार करैत अछि। माघ मास मे अहि ठाम एकटा पैघ मेला लागैत अछि, जतय श्रद्धालु अपन मन्नत पूरा भेला पर माताक आशीर्वाद लेबय अबैत छथि।

📍 दरभंगा, भारत

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सिमरौनगढ़
कला आ ज्ञान क गाम
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सिमरौनगढ़

सिमरौनगढ़, जे आइ नेपालक बारा जिला मे अवस्थित अछि, मध्यकालीन मिथिलाक गौरवशाली 'कर्नाट वंश' क ऐतिहासिक राजधानी छल। एकरा 'मिथिलाक हम्पी' कहनाइ कोनो अतिशयोक्ति नहि हेतैक, कियाक तँ एहि ठामक भव्य ईंटक संरचना आ प्राचीन मूर्तिक अवशेष एकटा महान साम्राज्यक वैभवक गवाह अछि। नान्यदेव द्वारा ११वीं शताब्दी मे स्थापित ई शहर अपन समय मे शिक्षा, संगीत आ कलाक एकटा पैघ केंद्र छल। १२म शताब्दी मे ई शहर अपन सफलताक चरम पर छल, मुदा बाद मे आक्रमणकारी सभक कारणे ई तबाह भ' गेल। आइयो सिमरौनगढ़ मे 'कंकाली माई' मंदिर आ कतेको प्राचीन तालाब (पोखरि) अछि जे कर्नाट कालीन स्थापत्य कलाक उत्कृष्ट नमूना थिक। एहि ठामक पुरातात्विक उत्खनन मे बेसाल्ट पत्थर सँ बनल अत्यंत सुंदर प्रतिमा सभ भेटल अछि, जे मिथिलाक प्राचीन मूर्तिकलाक गहीर जानकारी दैत अछि। सिमरौनगढ़ केवल इतिहास प्रेमियों लेल नहि, बल्कि ओहि सभ लेल एकटा तीर्थ थिक जे अपन पूर्वजक अद्भूत निर्माण कौशल आ प्रशासनिक मजबूती कें देखय चाहैत छथि।

📍 नेपाल

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