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Sama Chakeva (Kartik)

वृंदावन मे सामा खेलय (सामा-चकेवा गीत)

मैथिली लोक संगीत एवं स्वर पाठ

तानपूरा की शास्त्रीय संगति के साथ पारंपरिक मैथिली गीत का आनंद लें अथवा स्वयं गायन करें।

वर्तमान गायन / वाचन पंक्ति (1 / 6)

“वृंदावन मे आगि लागल, केओ न बुझावय हे,”

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मैथिली बोल

वृंदावन मे आगि लागल, केओ न बुझावय हे, हमर भैया चानन गाछी, पानि भरि-भरि मिझावय हे। सामा खेलय चलली बहिना, डाला सजाय हे, सतभैया आ चकेवा संगे, चुगला जरि जाय हे। धानक बाली, काँच केरा, सामा केँ खियाउ हे, हमर भैया लाख बरीस जीबथि, आशीष बरसाउ हे।

भावार्थ एवं संदर्भ

कार्तिक मास की चांदनी रातों में बहनों द्वारा अपने भाइयों की दीर्घायु और समृद्धि के लिए सामा-चकेवा के डाले के साथ गाया जाने वाला प्रसिद्ध पर्व गीत।

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