क्यों मनाया जाता है
मिथिला की लाड़ली बेटी और राजर्षि जनक की पुत्री जगजननी माता जानकी के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है।
इतिहास और कथा
वाल्मीकि रामायण के अनुसार, अकाल निवारण हेतु जब राजा जनक ने पुनौरा धाम (सीतामढ़ी) में यज्ञभूमि पर हल चलाया, तब वैशाख शुक्ल नवमी को हल की सीत से माता सीता का प्राकट्य हुआ।
कब मनाया जाता है
वैशाख शुक्ल नवमी (२५ अप्रैल २०२६)।
कैसे मनाया जाता है
सीतामढ़ी, जनकपुर धाम तथा मिथिला के घर-घर में कलश यात्रा, अरिपन, मैथिली सोहर गायन एवं मखाना खीर का महाप्रसाद।
त्योहार के बारे में
मिथिला वासियों के लिए माता सीता आराध्या होने के साथ-साथ घर की बेटी ("किशोरी जी") हैं। जानकी नवमी के दिन सम्पूर्ण मिथिलांचल में सोहर और मंगलगीत गाए जाते हैं तथा मठ-मंदिरों में विशेष जन्मोत्सव मनाया जाता है।
