Bhajan
जनक दुलारी
मैथिली बोल
सिया हे जनक दुलारी तुहुन तो प्राण हमारी। राम के बाम अंग सोहय जग के मनवा मोहय। कनक भवन में रहिये, अथवा वन में विचरिये सब दिन अहाँ के चरनन में रहय ध्यान हमारी।
सिया हे जनक दुलारी तुहुन तो प्राण हमारी। राम के बाम अंग सोहय जग के मनवा मोहय। कनक भवन में रहिये, अथवा वन में विचरिये सब दिन अहाँ के चरनन में रहय ध्यान हमारी।