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मिथिला फगुआ (होरी आ जोगीरा)

मिथिला फगुआ (होरी आ जोगीरा)

किएल मनाओल जाइत अछि

बसंत ऋतुक उल्लास, भक्त प्रह्लादक आस्थाक विजय आ समाज मे आपसी सिनेह बढ़ाबय लेल मनाओल जाइत अछि।

इतिहास आ कथा

मिथिला मे बसंत पंचमी दिन गोसाउनिक चरण मे अबीर चढ़ेबा सँ फगुआक आरम्भ भऽ जाइत अछि आ फागुन पूर्णिमाक राति सम्मत जरलाक बाद होरी खेलल जाइत अछि।

कखनि मनाओल जाइत अछि

फागुन पूर्णिमा आ चैत कृष्ण प्रतिपदा (३–४ मार्च २०२६)।

कोना मनाओल जाइत अछि

भोर मे धुरखेल, दुपहर मे रंग-अबीर, डम्फ आ ढोलक पर फगुआ आ जोगीरा गायन तथा पुआ, पिरुकिया आ दही-बड़ाक भानस।

पावनि क बारे मे

मिथिलाक फगुआ गीत-नाद आ अपनत्वक महापर्व छी। टोल-पड़ोसक लोक एकठाम जुटि ढोलक-झाल संग विद्यापतिक बसंत पद आ जोगीरा गाबैत छथि। छोट लोकनि पैघक गोड़ छूबि अबीर लगबैत छथि आ हर घर मे पुआ-पिरुकिया परसल जाइत अछि।