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बारहमासा
मैथिली लोक संगीत एवं स्वर पाठ
तानपूरा की शास्त्रीय संगति के साथ पारंपरिक मैथिली गीत का आनंद लें अथवा स्वयं गायन करें।
वर्तमान गायन / वाचन पंक्ति (1 / 12)
“अगहन मास जे धान सुखाएल”
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मैथिली बोल
अगहन मास जे धान सुखाएल पूस मास जाड़ हो माघ मास जे पाला पड़ल फागुन में रंग गुलाल हो। चैत मास में कटनी होय वैशाख में लगनी होर जेठ मास जे लू बहाय आषाढ़ में बरखा जोर। सावन में सब हरियर होय भादो में नदी उफान आशिन में दुर्गा पूजा कातिक में छठ महान।
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