बारहमासा
मैथिली लोक संगीत एवं स्वर पाठ
तानपूरा की शास्त्रीय संगति के साथ पारंपरिक मैथिली गीत का आनंद लें अथवा स्वयं गायन करें।
“अगहन मास जे धान सुखाएल”
मैथिली बोल
अगहन मास जे धान सुखाएल पूस मास जाड़ हो माघ मास जे पाला पड़ल फागुन में रंग गुलाल हो। चैत मास में कटनी होय वैशाख में लगनी होर जेठ मास जे लू बहाय आषाढ़ में बरखा जोर। सावन में सब हरियर होय भादो में नदी उफान आशिन में दुर्गा पूजा कातिक में छठ महान।
भावार्थ एवं संदर्भ
बारहमासा — मिथिला की लोक-परंपरा और संस्कार (All Seasons) से जुड़ा पारंपरिक मैथिली लोकगीत। Barahmasa describes the characteristics and activities associated with each of the 12 months of the Hindu calendar, painting a picture of rural life: Harvest in Aghahan, Cold in Paus/Magh, Holi in Phagun, Harvest in Chait, Heat in Jeth, Rain in Ashadh/Sawan, Floods in Bhado, Festivals in Ashvin/Kartik.
अन्य प्रसिद्ध मैथिली लोकगीत
संबंधित लोककथाएं, संगीत, कला व दर्शनीय स्थल देखें
मिथिला विरासत का निरंतर अन्वेषण करें
संबंधित मुख्य मंचों, उपयोगी टूल्स और परंपराओं को देखें
