Nachari (Vidyapati Shiva Hymn)
कखन हरब दुख मोर हे भोलानाथ (विद्यापति नचारी)
रचयिता:विद्यापति
मैथिली लोक संगीत आ स्वर पाठ
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वर्तमान गायन / वाचन पंक्ति (1 / 9)
“कखन हरब दुख मोर हे भोलानाथ,”
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मैथिली बोल
कखन हरब दुख मोर हे भोलानाथ, दुखहि जनम भेल, दुखहि गमाओल, सुख सपनहुँ नहि भेल हे भोलानाथ। आछत चानन आओर गंगाजल, बेलपात तोहि चढ़ाएब हे भोलानाथ। एहि भवसागर थाह कतहु नहि, भैरव धरि कऽ पार करु हे भोलानाथ। भनहि विद्यापति मोर भोलानाथ गति, चरण शरण मोहि राखु हे भोलानाथ।
भावार्थ एवं संदर्भ
महाकवि विद्यापतिक अमर शिव नचारी, जाहि मे कवि बाबा भोलानाथ केँ बेलपात, चानन आ गंगाजल चढ़ा कऽ अपन दुख हरबाक करुण प्रार्थना करैत छथि।
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