Bhajan
जनक दुलारी
मैथिली लोक संगीत आ स्वर पाठ
तानपूराक शास्त्रीय संगति संग पारंपरिक मैथिली गीतक आनंद लिअ अथवा स्वयं गायन करू।
वर्तमान गायन / वाचन पंक्ति (1 / 8)
“सिया हे जनक दुलारी”
जे पंक्ति सँ सुनय चाहैत छी, ताहि पर टैप करू:
मैथिली बोल
सिया हे जनक दुलारी तुहुन तो प्राण हमारी। राम के बाम अंग सोहय जग के मनवा मोहय। कनक भवन में रहिये, अथवा वन में विचरिये सब दिन अहाँ के चरनन में रहय ध्यान हमारी।
भावार्थ एवं संदर्भ
जनक दुलारी — मिथिलाक लोक-परंपरा आ संस्कार (Bhajan) सँ जुड़ल पारंपरिक मैथिली लोकगीत। A bhajan dedicated to Sita, the daughter of Janak ('Janak Dulari'), calling her the life-breath of the devotees. It vows devotion whether she is in the palace or the forest.
संबंधित अन्वेषण
अन्य प्रसिद्ध मैथिली लोकगीत
संबंधित लोककथा, संगीत, कला आ दर्शनीय स्थल देखू
Next to Explore
मिथिला विरासतक निरंतर अन्वेषण करू
संबंधित मुख्य मंच, उपयोगी टूल्स आ परंपरा सभकें देखू
