Navratri
दुर्गा स्तुति
मैथिली लोक संगीत आ स्वर पाठ
तानपूराक शास्त्रीय संगति संग पारंपरिक मैथिली गीतक आनंद लिअ अथवा स्वयं गायन करू।
वर्तमान गायन / वाचन पंक्ति (1 / 9)
“या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता।”
जे पंक्ति सँ सुनय चाहैत छी, ताहि पर टैप करू:
मैथिली बोल
या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ मिथिला के कण-कण में वास अहाँ के दशों दिशा में प्रकाश अहाँ के हे माँ शेरावाली, हे माँ जोतावाली। दुख-दारिद्र हरू, सुख-संपत्ति दिअ बाल-बच्चा के, रक्षा करू हे। चरण में राखूँ, आशीष दिअ हे जगदम्बे, हे महाकाली।
संबंधित अन्वेषण
अन्य प्रसिद्ध मैथिली लोकगीत
संबंधित लोककथा, संगीत, कला आ दर्शनीय स्थल देखू
Next to Explore
मिथिला विरासतक निरंतर अन्वेषण करू
संबंधित मुख्य मंच, उपयोगी टूल्स आ परंपरा सभकें देखू
