कजरी - सावन
मैथिली लोक संगीत आ स्वर पाठ
तानपूराक शास्त्रीय संगति संग पारंपरिक मैथिली गीतक आनंद लिअ अथवा स्वयं गायन करू।
“रिमझिमि बरसेला बदरिया,”
मैथिली बोल
रिमझिमि बरसेला बदरिया, मनवा हमार तरसे हो। सावन में झूले कृष्ण-राधा कदम के डरिया हो। रिमझिमि बरसेला बूँद सुहावन पिया परदेस, जियरा घबरावन। मोरवा नाचै, कोयल बोलै दादुर शोर मचाये हो काली घटा, नभ में छाये बिजुली चमक डराये हो।
भावार्थ एवं संदर्भ
कजरी - सावन — मिथिलाक लोक-परंपरा आ संस्कार (Monsoon (Sawan)) सँ जुड़ल पारंपरिक मैथिली लोकगीत। Kajri is the song of the monsoon (Sawan). This song describes the gentle drizzling rain ('Rimjhim barsela') and the longing of the heart, often evoking the image of Radha and Krishna swinging on the Kadamba tree, peacocks dancing, and the fear of lightning.
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