पाछाँ (मंत्र)
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सावित्री व्रत मंत्र

ritualvratsavitri

अवैधव्यं च सौभाग्यं देहि त्वं मम सुव्रते ।

पुत्रान्‌ पौत्रांश्च सौख्यं च गृहाणार्घ्यं नमोऽस्तुते ॥

वट सिंचामि ते मूलं सलिलैरमृतोपमैः ।

यथा शाखाप्रशाखाभिर्वृद्धोऽसि त्वं महीतले ।

तथा पुत्रैश्च पौत्रैश्च सम्पन्नं कुरु मां सदा ॥

भावार्थ

हे उत्तम व्रत कऽ पालन कएनिहारि सावित्री! अहाँ हमरा अखंड सौभाग्य आ नीक भाग्य प्रदान करू। हमरा पुत्र, पौत्र आ पारिवारिक सुख दिअ; हमर ई अर्घ्य स्वीकार करू, अहाँक नमस्कार अछि। हे वट वृक्ष! हम अहाँक जड़ि केँ अमृत सनक जल सँ सींचैत छी। जेना अहाँ शाखा आ उपशाखा सभ सँ एहि पृथ्वी पर विशाल भेल छी, तहिना हमरा सेहो सदा पुत्र-पौत्र आ समृद्धि सँ संपन्न राखू।

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