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Historical Manuscript
वर्णरत्नाकर (१३२४ ई.)
रचनाकार / स्रोतः कविशेखराचार्य ज्योतिरीश्वर ठाकुर
“मैथिली ही नहीं, अपितु समग्र उत्तर भारतीय आधुनिक आर्य भाषाओं का सबसे प्राचीन उपलब्ध गद्य ग्रंथ, जिसकी रचना कर्णाट वंश के महाराज हरिसिंहदेव के शासनकाल में हुई।”
साहित्यिक महत्व एवं सारांश
सात 'कल्लोलों' (अध्यायों) में विभाजित 'वर्णरत्नाकर' १४वीं शताब्दी के मिथिला के राजदरबार, संगीत, नृत्य, वस्त्र, खान-पान, नगर-विन्यास और संस्कृति का अद्भुत विश्वकोश है। इसकी मूल पांडुलिपि प्राचीन तिरहुता (मिथिलाक्षर) लिपि में संरक्षित है।