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खट्टर काकाक तरंग एवं पत्रहीन नग्न गाछ
Modern Classics

खट्टर काकाक तरंग एवं पत्रहीन नग्न गाछ

रचनाकार / स्रोतः प्रो. हरिमोहन झा एवं बाबा नागार्जुन ('यात्री')

“२०वीं सदी के मैथिली साहित्य के दो महान स्तंभ— प्रो. हरिमोहन झा का तर्कपूर्ण हास्य-व्यंग्य 'खट्टर काकाक तरंग' और जनकवि 'यात्री' (नागार्जुन) की साहित्य अकादमी पुरस्कृत कृति 'पत्रहीन नग्न गाछ'।”

साहित्यिक महत्व एवं सारांश

'खट्टर काका' मिथिला के घर-घर में लोकप्रिय वह दार्शनिक-व्यंग्य चरित्र हैं जो न्यायशास्त्र के तर्कों और विनोद से रूढ़ियों पर प्रहार करते हैं। वहीं बाबा नागार्जुन ('यात्री') ने अपनी कविताओं से मिथिला के ग्रामीण यथार्थ और जनचेतना को स्वर दिया।