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सामा चकेवा

सामा चकेवा

क्यों मनाया जाता है

भाई-बहन के पवित्र प्रेम का उत्सव और सर्दियों में आने वाले प्रवासी पक्षियों का स्वागत।

इतिहास और कथा

भगवान कृष्ण की पुत्री सामा और भाई साम्ब की पौराणिक कथा, जो न्याय और स्नेह की विजय दर्शाती है।

कब मनाया जाता है

कार्तिक शुक्ल सप्तमी से पूर्णिमा तक।

कैसे मनाया जाता है

मिट्टी की मूर्तियां बनाना, रात में लोक गीत गाना, चुगला की मूछें जलाना और अंत में विसर्जन।

त्योहार के बारे में

सामा चकेवा मिथिला का सबसे प्यारा लोक पर्व है। यह भाई-बहन के प्रेम और हिमालय से आने वाले प्रवासी पक्षियों के प्रति स्नेह का पर्व है। बहनें मिट्टी की मूर्तियां बनाती हैं और रात में खेतों में जाकर सामूहिक रूप से लोक गीत गाती हैं। कार्तिक पूर्णिमा के दिन इन मूर्तियों का विसर्जन होता है। यह पर्व बताता है कि प्रकृति और परिवार का बंधन कितना अटूट और सुंदर है।