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चौठ चंद्र (चौरचन)

चौठ चंद्र (चौरचन)

क्यों मनाया जाता है

भगवान चंद्रमा की आराधना और जीवन में कलंक व झूठे आरोपों से मुक्ति की प्रार्थना।

इतिहास और कथा

16वीं शताब्दी में राजा हेमांगद ठाकुर की सुरक्षित वापसी और चंद्रमा के दोष मुक्त होने की लोक कथा से प्रेरित।

कब मनाया जाता है

भाद्र मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी।

कैसे मनाया जाता है

आंगन में अरिपन बनाना, दिन भर उपवास और चंद्रोदय पर दही, मिठाई व फलों का अर्घ्य देना।

त्योहार के बारे में

चौरचन मिथिला का एक अनूठा खगोलीय और सांस्कृतिक उत्सव है। इस दिन डूबते हुए चंद्रमा की पूजा की जाती है। घर के आंगन को चावल के पिसे हुए लेप (अरिपन) से सुंदर बनाया जाता है। शाम को घर के सदस्य हाथों में पकवान और फल लेकर चंद्रमा को अर्घ्य देते हैं। मिथिला की मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा की पूजा करने से व्यक्ति पर कोई झूठा आरोप नहीं लगता।