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कोजागरा (लक्ष्मी पूजा)

कोजागरा (लक्ष्मी पूजा)

क्यों मनाया जाता है

समृद्धि की देवी लक्ष्मी का स्वागत और नवविवाहित दामाद को सम्मानित करना।

इतिहास और कथा

मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात लक्ष्मी जी पृथ्वी पर विचरण करती हैं और जागने वालों को आशीष देती हैं।

कब मनाया जाता है

आश्विन पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा)।

कैसे मनाया जाता है

ससुराल से 'भार' (मखाना, पान, उपहार) भेजना, रात भर जागरण, पारंपरिक खेल और खीर का सेवन।

त्योहार के बारे में

कोजागरा मिथिला में शरद पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। यह पर्व विशेष रूप से उन घरों में मनाया जाता है जहाँ उस वर्ष शादी हुई हो। ससुराल की ओर से दूल्हे के लिए मखाना, पान, कपड़े और मिठाइयाँ भेजी जाती हैं जिन्हें 'भार' कहा जाता है। मखाना मिथिला की समृद्धि का प्रतीक है। रात भर लोग जागते हैं, पारंपरिक खेल (कौड़ी) खेलते हैं और चंद्रमा की चांदनी में रखी खीर खाते हैं।