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तिला संक्रांति (मकर संक्रांति)

तिला संक्रांति (मकर संक्रांति)

किएल मनाओल जाइत अछि

ई सूर्यक मकर राशि मे प्रवेश आ उत्तरायणक शुरुआतक प्रतीक अछि, जे मिथिलाक कृषि आ ऊर्जा लेल अत्यंत महत्वपूर्ण अछि।

इतिहास आ कथा

प्राचीन मैथिल विद्वान सब एहि दिन कें 'दान' लेल विशेष महत्व देने छथि। ई जाड़क अंत आ पवित्र उत्तरायण कालक आगमन अछि।

कखनि मनाओल जाइत अछि

प्रत्येक वर्ष मध्य जनवरी (मकर संक्रांति) कें मनाओल जाइत अछि।

कोना मनाओल जाइत अछि

एहि मे अनिवार्य 'कमला स्नान', अंगना मे 'घूरा' (अलाव) जराएब आ 'तिलकत भरना' सन रस्म शामिल अछि, जतय माय सब बच्चा कें तिल-गुड़ सँ आशीर्वाद दैत छथि।

पावनि क बारे मे

मिथिला मे तिला संक्रांति (तिला संकरात) स्वास्थ्य आ परिवारक दीर्घायु क एकटा गहीर उत्सव अछि। दिनक शुरुआत पवित्र स्नान सँ होइत अछि, जाहि कें अधिकांश लोक 'कमला नदी' (कमला माई) क तट पर करब शुभ मानैत छथि। जाड़ सँ बचय लेल, परिवार 'घूरा' क चारू कात जमा होइत छथि। माय सब 'तिलकत भरना' क रस्म निबैत छथि, जाहि मे बच्चा सब कें तिल आ गुड़ क लड्डू सँ आशीर्वाद देल जाइत अछि। कनिया सब लेल, ई मास भरि चलय वाला 'तुसारी पूजा' क शुरुआतक प्रतीक अछि। उत्सव क भोजन मे 'दही-चूड़ा' आ साँझ कें अपन 'चारि यार' (दही, पापड़, घी, अचाआर) क संग 'खिचड़ी' आ 'अलुआ' सन पारंपरिक कंदमूल शामिल रहैत अछि।