किएल मनाओल जाइत अछि
विद्या आ कलाक अधिष्ठात्री देवी सरस्वतीक आराधना आ बसंतक स्वागत।
इतिहास आ कथा
मिथिलाक सदियों पुरान ज्ञान-विज्ञानक परंपरा आ शास्त्रार्थिक गरिमाक प्रतीक।
कखनि मनाओल जाइत अछि
माघ शुक्ल पंचमी (बसंत पंचमी) कें।
कोना मनाओल जाइत अछि
पीयर कपड़ा पहirब, विद्यालय आ घर मे देवीक मूर्तिक पूजा आ पीयर मिठाईक भोग।
पावनि क बारे मे
मिथिला मे सरस्वती पूजा ज्ञानक उत्सव क रूप मे मनाओल जाइत अछि। छात्र अपन पोथी-पुरान आ कलाकार अपन वाद्ययंत्र देवीक पैर पर रखैत छथि। एतय 'अक्षर आरंभ'क विशेष महत्व अछि जतय बच्चा सबहक शिक्षाक शुरुआत होइत अछि। तोरीक पीयर फूल आ बसंती पवन पूरा वातावरण कें भक्ति आ उत्साह सँ भरि दैत अछि।
