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सामा चकेवा

सामा चकेवा

किएल मनाओल जाइत अछि

भाई-बहिनक प्रेमक उत्सव आ जाड़ मे अबय वाला पक्षी प्रति आत्मीयता।

इतिहास आ कथा

सामा आ साम्ब क प्राचीन कथा जे पवित्र स्नेह आ न्याय क विजय क गवाह अछि।

कखनि मनाओल जाइत अछि

कातिक शुक्ल सप्तमी सँ पूर्णिमा धरि।

कोना मनाओल जाइत अछि

माटियक सुंदर मूर्ति बनायब, राति मे सामूहिक लोक गीत गाएब आ चुगला कें दहन करब।

पावनि क बारे मे

सामा चकेवा मिथिलाक लोक-कला आ स्नेहक अद्वितीय दर्पण अछि। बहिन सब अपन भाईक दीर्घायु लेल माटियक मूर्ति बना क' ओकरा सँ खेलैत छथि आ गीत गबैत छथि। ई पर्व प्रवासी पक्षी सबहक स्वागतक पर्व सेहो अछि। कार्तिक पूर्णिमाक राति मे एहि मूर्ति सबहक विसर्जन क संग भाई-बहिनक अटूट सन स्नेहक एकटा अध्याय पूरा होइत अछि।