किएल मनाओल जाइत अछि
भाई-बहिनक प्रेमक उत्सव आ जाड़ मे अबय वाला पक्षी प्रति आत्मीयता।
इतिहास आ कथा
सामा आ साम्ब क प्राचीन कथा जे पवित्र स्नेह आ न्याय क विजय क गवाह अछि।
कखनि मनाओल जाइत अछि
कातिक शुक्ल सप्तमी सँ पूर्णिमा धरि।
कोना मनाओल जाइत अछि
माटियक सुंदर मूर्ति बनायब, राति मे सामूहिक लोक गीत गाएब आ चुगला कें दहन करब।
पावनि क बारे मे
सामा चकेवा मिथिलाक लोक-कला आ स्नेहक अद्वितीय दर्पण अछि। बहिन सब अपन भाईक दीर्घायु लेल माटियक मूर्ति बना क' ओकरा सँ खेलैत छथि आ गीत गबैत छथि। ई पर्व प्रवासी पक्षी सबहक स्वागतक पर्व सेहो अछि। कार्तिक पूर्णिमाक राति मे एहि मूर्ति सबहक विसर्जन क संग भाई-बहिनक अटूट सन स्नेहक एकटा अध्याय पूरा होइत अछि।
