किएल मनाओल जाइत अछि
ऐश्वर्यक देवी लक्ष्मीक स्वागत आ नव-विवाहित दामाद क सम्मान।
इतिहास आ कथा
मान्यता अछि जे शरद पूर्णिमाक राति मे लक्ष्मी जी घुमैत छथि आ जे जागैत अछि हुनका धन-धान्य सँ भरि दैत छथि।
कखनि मनाओल जाइत अछि
आसिन पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा) कें।
कोना मनाओल जाइत अछि
ससुराल सँ 'भार' (मखाना, पान, उपहार) पठाएब, राति भरि जागरण आ कौड़ी खेलब।
पावनि क बारे मे
कोजागरा मिथिलाक एकटा उत्सव अछि जतय मखाना आ पानक प्रधानता रहैत अछि। विशेष रूप सँ नवविवाहित युवक क लेल हुनकर ससुराल सँ पैघ स्तर पर उपहार अबैत छथि। राति मे चाँदक उजला रोशनी मे लोक मखाना-दूध खाइत छथि आ लक्ष्मी जीक आगमनक प्रतीक्षा मे राति भरि गीत-नाद आ खेल-तमाशा मे लागल रहैत छथि।
