किएल मनाओल जाइत अछि
चंद्रमाक पूजा आ मानसिक शांति व जीवन क निष्कलंक रहबाक प्रार्थना।
इतिहास आ कथा
राजा हेमांगद ठाकुरक समय सँ प्रचलित ई पर्व चंद्रमाक ऐतिहासिक आ खगोलीय महत्व कें दर्शाबैत अछि।
कखनि मनाओल जाइत अछि
भाद्र मासक शुक्ल पक्षक चतुर्थी कें।
कोना मनाओल जाइत अछि
अंगना मे पिठार (चाउर क लेप) सँ अरिपन बनायब, उपवास आ चाँद कें दही-मिठाईक अर्घ्य देब।
पावनि क बारे मे
चौरचन मिथिलाक एकटा एहन पर्व अछि जाहि मे डूबैत चंद्रमाक पूजा कएल जाइत अछि। लोक अपन अंगना मे चंद्रमाक लेल तरह-तरहक पकवान (पूरी, खजूर, दही) सजा क' रखैत छथि आ हाथ मे फल लय क' चंद्रमाक दर्शन करैत छथि। मान्यता अछि जे एहि दिन चंद्रमा कें देखला सँ कोनो मिथ्या कलंक नय लगैत अछि।
