गीत पर घुरु
Nachari (Shiva)

उगना रे मोर कतय गेलाह

मैथिली बोल

उगना रे मोर कतय गेलाह कतय गेलाह शिव, कतय गेलाह। भाँग धतुरबा, हम पीस बैसेलहुँ बसाहा चढ़ि कतय गेलाह। गौरी के संगे, गिरिजा के संगे कैलास छोड़ि कतय गेलाह। भटकत फिरैछी, वन-वन हम दर्शन दिअ, अब नहिं तड़पाव विद्यापति के, स्वामी कहाव उगना रूप, फेर देखाव।

भावार्थ