किएल मनाओल जाइत अछि
मैथीली नव वर्षक स्वागत आ गर्मी मे शीतलता ओ प्रकृति संरक्षणक आह्वान।
इतिहास आ कथा
मेष संक्रांति सँ शुरू होबय वाला ई पर्व सौर नव वर्षक ग्रामीण परंपरा सँ जुड़ल अछि।
कखनि मनाओल जाइत अछि
मध्य अप्रैल (मेष संक्रांति) कें।
कोना मनाओल जाइत अछि
बृद्ध लोकनि द्वारा बच्चा सबहक माथ पर पानि ढारि 'शीतल' रहबाक आशीर्वाद आ गाछ-बिरिछ मे पानि देब।
पावनि क बारे मे
जुड़ शीतल मिथिलाक नव वर्ष अछि जे पूर्णतः पर्यावरणक प्रति समर्पित अछि। एहि दिन लोक अपन घरक बुजुर्ग सँ पानि सँ 'जुड़ाएब' (शीतल होब) क आशीर्वाद लैत छथि। लोक अपन पोखरि-इनार साफ करैत छथि आ पशु-पक्षी क लेल पानि राखैत छथि। विशेष रूप सँ एहि दिन 'बड़ी-भात' (बासी भोजन) खायल जाइत अछि जे शरीर कें ठंडा रखबाक प्रतीक अछि।
