किएल मनाओल जाइत अछि
सृष्टिक स्रोत सूर्य देव आ षष्ठी देवी क प्रति कृतज्ञता आ भक्ति।
इतिहास आ कथा
नदी तट पर सूर्यक उपासनाक अनादि परंपरा जे प्रकृति आ मनुष्यक अटूट नाता कें दर्शाबैत अछि।
कखनि मनाओल जाइत अछि
कातिक शुक्ल षष्ठी कें।
कोना मनाओल जाइत अछि
चारि दिनक कठोर व्रत: नहाय-खाय, खरना, साँझक अर्घ्य आ भोरक अर्घ्य।
पावनि क बारे मे
छठि पूजा मिथिलाक संस्कृति क प्राण अछि। ई पर्व सादगी, स्वच्छता आ समानता क संदेश दैत अछि। एहि मे डूबैत सूर्य आ उगैत सूर्य दूनू कें अर्घ्य देल जाइत अछि। घाट पर गान बहय वाला शारदा सिन्हाक गीत आ ठेकुआक सुगंध पूरा क्षेत्र कें आध्यात्मिक बना दैत अछि। ई बिना कोनो पुरोहितक कएल जाय वाला लोक-उत्सव अछि।
