Batgamni
बटगमनी - चलहूँ सखी
मैथिली लोक संगीत एवं स्वर पाठ
तानपूरा की शास्त्रीय संगति के साथ पारंपरिक मैथिली गीत का आनंद लें अथवा स्वयं गायन करें।
वर्तमान गायन / वाचन पंक्ति (1 / 10)
“चलहूँ सखी, फुलवा लोढ़े चलु”
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मैथिली बोल
चलहूँ सखी, फुलवा लोढ़े चलु फुलवरिया में। कोन फूल फुलल, कोन फूल मउरल केकर बास बहार हो? बेली फुलल, चमेली फुलल अड़हुल बास बहार हो। सीता संगे सखी सब चलली हंसी-ठिठोली करैत हो माली के बगिया, सोहय बड निक सब सखी फूल लोढ़ैत हो।
भावार्थ एवं संदर्भ
बटगमनी - चलहूँ सखी — मिथिला की लोक-परंपरा और संस्कार (Batgamni) से जुड़ा पारंपरिक मैथिली लोकगीत। Batgamni songs are sung by women while walking or doing chores together. This one invites friends ('Sakhi') to pluck flowers in the garden, asking which flowers are blooming and fragrant (Jasmine, Hibiscus).
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