अहिल्या स्थान
📍 दरभंगा, भारत

अहिल्या स्थान, मिथिला के सबसे पवित्र पौराणिक स्थलों में से एक है, जो दरभंगा जिले के जाले प्रखंड के अहियारी गाँव में स्थित है। यह स्थान रामायण की एक अत्यंत मार्मिक और महत्वपूर्ण घटना 'अहिल्या उद्धार' का साक्षी माना जाता है। हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, ऋषि गौतम की सुंदर पत्नी अहिल्या, एक श्राप के कारण पत्थर बन गई थीं। सदियों बाद, जब भगवान राम अपने गुरु विश्वामित्र और भाई लक्ष्मण के साथ जनकपुर जा रहे थे, तब उनके चरणों के स्पर्श से अहिल्या पुनर्जीवित हुईं और उन्हें श्राप से मुक्ति मिली। वर्तमान मंदिर का निर्माण १७वीं-१८वीं शताब्दी के दौरान दरभंगा के महाराजाओं द्वारा कराया गया था, जो अपनी विशिष्ट स्थापत्य शैली के लिए जाना जाता है। मंदिर परिसर में एक शिला (पत्थर) है जिसे देवी अहिल्या का प्रतीक मानकर पूजा जाता है। रामनवमी और विवाह पंचमी के दौरान यहाँ भारी भीड़ उमड़ती है, जहाँ मैथिल महिलाएँ गीतों के माध्यम से अहिल्या की गाथा सुनाती हैं। यह स्थल न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह नारीत्व के धैर्य और दिव्य क्षमा के मैथिल दर्शन को भी दर्शाता है। यहाँ का शांत और आध्यात्मिक वातावरण आगंतुकों को प्राचीन तपोवन युग की याद दिलाता है।
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