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Vivah (Wedding)

Sita Swayamvar

सीता स्वयंवर

Maithili Lyrics

देखू देखू सखी हे, मिथिला नगरिया सिया जी के संगे बियाह रचावे, राम जी के गुजरिया। कौशल्या नंदन, दशरथ के नंदन चारु भाइ शोभित, जनक दुअरिया। लक्ष्मण, भरत, शत्रुध्न सँग सोहे राम चन्द्र जी के, सांवर सुरतिया। पान, मखान, और सजी रे डलिया स्वागत में ठाढ़, सब जनक नगरिया। धन्य-धन्य हे मिथिला, धन्य जनक दुलारी राम जी के पाबि भेल पूर्ण सब आस हमारी।

Meaning & Context

A wedding song describing the scene of Sita's Swayamvar in Mithila. It invites friends to witness the arrival of Lord Ram and his brothers at King Janak's doorstep, and the joy of the entire city.